बिजनौर। जिले में रोक के बाद भी चीनी मांझा खूब बिक रहा है। जान जोखिम में डालकर बच्चे व बड़े इस मांझे से पतंग उड़ा रहे हैं। पतंगबाजों के साथ ये मांझा पक्षियों की भी जान का दुश्मन बन गया है। जिले में पतंग के शौकीन अपना शौक पूरा करने के लिए इस मांझे का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।
जिले में छोटे बच्चों से लेकर बड़े तक पतंग उड़ाने के लिए चीनी मांझे का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये मांझा बाजार में खुलेआम बिक रहा है लेकिन बेचने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रहा है। जिले में प्रशासन ने चीनी मांझे के खिलाफ कई बार जागरुकता अभियान चलाया लेकिन जिले में बिजनौर, नजीबाबाद, झालू, किरतपुर, नहटौर, धामपुर, चांदपुर के साथ छोटे कस्बों व गांव में मांझा खूब बेचा जा रहा हैं। चीनी मांझे से पतंगबाजी से उंगली कटने का खतरा हो जाता है। शरीर के किसी भी हिस्से में अगर मांझा फंस जाए तो यह जख्मी कर डालता हैं।
पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा
चीनी मांझे से सबसे ज्यादा नुकसान पक्षियों को उठाना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को नगीना में उड़ते समय एक सारस पतंग के मांझे की चपेट में आकर घायल हो गया था। सारस को देखने वालों की भीड़ लग गई थी लेकिन बचाव के प्रयास में सारस ने दम तोड़ दिया। शुक्रवार को अफजलगढ़ में गांव भागीजोत का शाहिद मांझे की चपेट में आकर घायल हो गया। उसकी गर्दन में तीन टांके लगाने पड़े। छोटे पक्षियों के लिए मांझा जानलेवा साबित हो रहा है। मांझा उनके पंजों में फंस जाता है। पंजों से मांझा निकल नहीं पाता और धीरे-धीरे करके गुरगल के पंजे कट जाते हैं और गुरगल अपाहिज हो जाती हैं।
पतंग का पीछा करते समय भी हो जाते है घायल
पतंग का पीछा करते समय बच्चे हादसे का शिकार हो जाते हैं। ये बच्चे सड़क व छत पर दौड़ते समय केवल पंतग का देखते हैं। छत से नीचे गिर जाते हैं। कई बार घायल होने के साथ बच्चों की जान भी जा चुकी हैं। दो साल पहले झालू में एक बालक की पतंग का पीछा करते समय छत से गिरकर मौत हो गई थी। बिजनौर निवासी अर्पित टांक के मुताबिक पतंग उड़ाते समय पतंगबाज ठुमकी एक जगह खड़े होकर लगाए। बच्चे कतई पतंग लूटने का प्रयास न करें। मांझे को उंगलियों में न फंसाएं। स्वदेशी मांझे का इस्तेमाल करे।
चीनी मांझा बेचने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विक्रमादित्य मलिक के मुताबिक चीनी मांझा बचेने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। ये मांझा नहीं बिकने दिया जाएगा। पतंगबाज भी चीनी मांझे से दूर रहें।
कांच से बनने के कारण मांझे की धार होती है तेज
जिला अस्पताल जनरल सर्जन डा. अरुण कुमार पांडेय के मुताबिक चीनी मांझा बारीक कांच को पीसकर बनाया जाता हैं। इस कारण इसकी धार तेज हाती है। जहां ज्यादा पतगंबाजी होती है, वहां मांझे से घायल होने के मामले सामने आते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों को इस मांझे के इस्तेमाल से देर रहना चाहिए।
बिजनौर में चीनी मांझे से घायल गुरगल(फाइल फोटो)।- फोटो : BIJNOR
नगीना में चीनी मांझे की चपेट में आकर घायल सारस की बाद में मौत हो गई थी। (फाइल फोटो)।- फोटो : BIJNOR
अफजलगढ़ में चीनी मांझे की चपेट में आने से घायल युवक।- फोटो : BIJNOR