बिजनौर। भारत का यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता होने उद्यमी, निर्यातकों में खुशी है। ऐसे में यूरोप के साथ निर्यात बढ़ने पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे बेरोजगारी घटेगी। नगीना के काष्ठकला कारीगरों के यह सुनहरा अवसर है।
अमेरिका टैरिफ की वजह से काष्ठकला उद्योग काफी प्रभावित हुआ है। ऐसे में अब भारत-यूरोपीय संघ समझौते से उद्योग को रफ्तार मिलने की संभावना है। यूरोपीय देशों के साथ नगीना से सालाना करीब 400 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। समझौता होने से निर्यात में बढ़ोतरी होगी।
टैरिफ घटने के बाद से भारतीय उत्पाद यूरोपीय देशों में सस्ते हो जाएंगे। इससे नगीना की लकड़ी की नक्काशी के आभूषणों की काफी मांग है। जिसके चलते नगीना काष्ठकला उत्पादों की मांग बढ़ने पर उत्पाद भी बढ़ेगा।
उद्यमी अधिक उत्पादन करने के लिए कारीगरों की संख्या बढ़ाएंगे। इससे रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उद्यमियों के मुताबिक, अमेरिका टैरिफ की वजह से ऑर्डर मिलने में असमंजस की स्थिति रही। इससे उत्पादों का कम उत्पादन हुआ। यही वजह रही कि कारीगरों को रोजगार मिलना कम हो गया। अब यह समझौता उम्मीद की नई किरण है।