बिजनौर। 60 वर्ष की आयु पार कर चुके कई बुजुर्ग जन्म प्रमाणपत्र की मांग को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। यह स्थिति विशेष रूप से तब उत्पन्न हुई है जब वोट बनवाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों में जन्म प्रमाणपत्र की मांग की जा रही है। अकेले बिजनौर तहसील में ही लगभग तीन हजार बुजुर्गों ने जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया है। इसके अतिरिक्त, नजीबाबाद, नगीना, धामपुर और चांदपुर तहसीलों में भी पांच हजार से अधिक आवेदन जमा हुए हैं। यह संख्या दर्शाती है कि एक बड़ी आबादी इस नए नियम से प्रभावित हो रही है।
इस अचानक बढ़ी हुई मांग को सघन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) से जोड़कर देखा जा रहा है। सर्वे के दौरान या उसके बाद की प्रक्रियाओं में जन्म प्रमाण पत्र को एक अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया हो। इस कारण, जिन बुजुर्गों के पास यह दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, उन्हें वोट बनवाने या अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कई वर्षों से मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद, अब उन्हें इस नए प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक चुनौतियां और जांच प्रक्रिया
एसडीएम सदर रीतू रानी ने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में पूरी जांच-पड़ताल की जाती है। यह एक संवेदनशील प्रक्रिया है क्योंकि इससे व्यक्ति की आयु और पहचान का सत्यापन होता है। हालांकि, आवेदकों की बढ़ती संख्या के कारण प्रशासनिक अमले पर भी दबाव बढ़ गया है।