बिजनौर। अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कल्पना पांडेय ने नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म में ई-रिक्शा चालक अरुण को दोषी पाया है और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 55 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
थाना मंडावली के एक गांव निवासी व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उसकी 17 साल की बेटी 28 मई 2025 को कोचिंग के लिए नजीबाबाद जाने को घर से निकली। भागूवाला से वह अरुण कुमार पुत्र संजीव कुमार निवासी विजयपुर की ई-रिक्शा में सवार हो गई। गांव जटपुरा के पास पहुंचने पर आरोपी ने ई-रिक्शा की बैटरी खत्म होने की बात कही और बाग में ले गया। आरोपी ने बाग में छात्रा के साथ दुष्कर्म किया और रोता बिलखता मौके पर ही छोड़ गया। पीड़िता ने फोन करके परिवार वालों को जानकारी दी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया था। साथ ही विवेचना करने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मामले में ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत अभियोजन पक्ष और पुलिस ने मजबूती से पैरवी की। अदालत ने सुनवाई के बाद दोषी पाते हुए अभियुक्त अरुण कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
डीएनए रिपोर्ट बनी मजबूत आधार
अदालत ने कहा कि पीड़िता की गवाही को मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल जांच और डीएनए रिपोर्ट से पूरा समर्थन मिला। डीएनए रिपोर्ट में आरोपी का डीएनए मेल खाने से केस मजबूत हुआ। अदालत ने माना कि वैज्ञानिक साक्ष्य और मौखिक गवाहियां एक-दूसरे की पुष्टि करती हैं।
बचाव पक्ष के तर्क रहे निराधार
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी निर्दोष है, उसे झूठा फंसाया गया है तथा घटना के समय वह दूसरी जगह मौजूद था। इसके समर्थन में चार बचाव गवाह भी पेश किए गए। अदालत ने इन गवाहों की गवाही का विश्लेषण करते हुए कहा कि वे आरोपी का दूसरी जगह मौजूद होने का दावा सिद्ध नहीं कर सके।