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डीएसआर तकनीक : कम पानी में धान का ज्यादा उत्पादन

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ब्रजवीर चौधरी
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बिजनौर। मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा की आशंका के बीच धान की सीधी बुवाई (डायरेक्ट सीडेड राइस-डीएसआर) तकनीक किसानों के लिए लाभकारी विकल्प के रूप में उभर रही है। जल संकट, बढ़ती मजदूरी और लागत के दौर में यह तकनीक धान उत्पादन के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रभावी मानी जा रही है।
परंपरागत धान खेती में पहले नर्सरी तैयार की जाती है और बाद में पौधों की रोपाई की जाती है, जिसमें अधिक पानी और श्रमिकों की आवश्यकता होती है। समय भी ज्यादा लगता है। इसके विपरीत डीएसआर तकनीक में धान का बीज सीधे खेत में बोया जाता है। इस विधि में खेत को लगातार पानी से भरा रखने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि केवल नम मिट्टी ही पर्याप्त होती है।
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-डीएसआर मॉडल से 40 प्रतिशत पानी की बचत
कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि डीएसआर विधि से धान की बुवाई करने से 30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, जबकि नर्सरी तैयार करने, पौध उखाड़ने और रोपाई में लगने वाली श्रम लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी आती है। वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार जलभराव न होने से मिट्टी की संरचना और स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।
-आठ उन्नत प्रजातियों का चल रहा डीएसआर के तहत परीक्षण
डॉ. सिंह ने बताया कि वर्तमान में कृषि विज्ञान केंद्र नगीना में धान की कम अवधि वाली आठ उन्नत प्रजातियों का डीएसआर तकनीक के तहत परीक्षण किया जा रहा है। इन परीक्षणों का उद्देश्य ऐसी किस्मों का चयन करना है जो कम पानी में बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हों।
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-2500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस तकनीक से बुवाई की संभावना
वैज्ञानिक के अनुसार जिले में पिछले वर्ष डीएसआर तकनीक के उत्साहजनक परिणाम सामने आए थे। इन्हीं सकारात्मक अनुभवों को देखते हुए इस वर्ष बिजनौर में लगभग 2500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस तकनीक के विस्तार की संभावना जताई जा रही है। कृषि विभाग और केवीके किसानों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध करा रहे हैं।


डीएसआर विधि के लाभ
-नर्सरी और रोपाई की जरूरत नहीं
-कम समय में बुवाई पूरी, मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर
-खेत की अच्छी तैयारी के बाद सूखी मिट्टी में बुवाई करें।

किसान ऐसे करें बुवाई
-जीरो टिल सीड ड्रिल या हैप्पी सीडर का प्रयोग करें।
-बीज दर 20-25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (8-10 किलोग्राम प्रति एकड़) रखें।
-कतार से कतार की दूरी 20 से 22.5 सेंटीमीटर रखें।
-बीज 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई पर बोएं।
-बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई करें।

खरपतवार नियंत्रण
-धान बुवाई से 20-25 दिन पहले गहरी जुताई करें।
-स्टेल सीड बेड तकनीक अपनाकर शुरुआती खरपतवार नष्ट करें।
-बुवाई के 25-30 दिन बाद अथवा 4-6 पत्ती अवस्था में बिस्पाइरिबैक सोडियम 10 प्रतिशत एससी का 100-120 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
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