िकसान दिवस को संबोधित करते सीडीओ डा. इंद्रमणि त्रिपाठी।
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बिजनौर में किसान दिवस में नहरों में पानी नहीं छोड़ने का मामला प्रमुखता से उठा। किसानों का आरोप है कि नहरों में पानी देर से छोड़ने पर गेहूं की अर्ली वैरायटी की बुवाई पर असर पड़ेगा। सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि अब हर किसान दिवस में विभागवार कराए गए कामों का प्रोजेक्टर द्वारा प्रदर्शन होगा। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।
विकास भवन के सभागार में आयोजित किसान दिवस में किसानों की शिकायतों के निपटारे का विवरण प्रस्तुत किया गया। सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी के अनुसार बासमती धान की फसल में दाना नहीं पड़ने से हुए नुकसान का प्रस्ताव शासन को मुआवजे के लिए भेज दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि किसानों ने धान का बीमा नहीं करा रखा है। इसके चलते बीमा कंपनी मुआवजा नहीं दे सकती है, इसलिए मुआवजे का भुगतान कृषि विभाग की किसी योजना से कराया जाए। किसानों का कहना था कि रबी की फसल की बुवाई के लिए खेत का पलेवा करना है, परंतु नहरों में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है।
जवाब में सिंचाई विभाग के नुमाइंदे ने कहा कि 20 नवंबर तक नहरों में पानी चालू हो जाएगा। भाकियू के जिला अध्यक्ष रामअवतार सिंह ने इस पर एतराज जताते हुए कहा कि देर से पानी छोड़ने से गेहूं की बुवाई कम रकबे में होगी। बैठक में नहरों की पटरी काटने और नहरों की पटरी पर पशु बांधने का मामला उठाया गया। सीडीओ ने किसानों को भरोसा दिया कि ऐसे पशुपालकों के खिलाफ पुलिस में एफआइआर कराई जाएगी। घर बैठकर नौकरी लेने वाले सींचपालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मंगोलपुरा, शादीपुर, चंदक आदि क्षेत्रों में ट्यूबवेल खराब होने की शिकायत की गई। डास्प द्वारा अनुदान पर मिलने वाले कृषि यंत्रों व लघु सिंचाई विभाग द्वारा कराए गए ट्यूबवेल बोरिंग में घटिया सामान लगाने तथा कमीशनखोरी के आरोप किसानों ने लगाए। बताया गया कि सरकारी केंद्रों पर गेहूं के बीज उपलब्ध हैं। किसानों में मंडी में फसल बेचने आने वाले किसानों से बैराज पुलिस चौकी पर अवैध वसूली करने के आरोप लगाए।