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नहीं भूलती अब तक यारो बचपन की आवारा होली ....

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नहीं भूलती अब तक यारो बचपन की आवारा होली ....
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धामपुर। काव्यमय पटल की ओर से शनिवार को होली की पूर्व संध्या पर काव्यमय रंगोत्सव 2021 का आयोजन हुआ। कवियों ने होली पर अपनी रचनाएं सुनाईं। कार्यक्रम ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से हुआ। गोष्ठी की शुरुआत कुमारी माला के काव्यपाठ से हुई। जिन्होंने ब्रज और राधा कृष्ण की होली पर सुंदर रचना प्रस्तुत की। दीपा शर्मा ने बरसाना की होली पर रचना प्रस्तुत की।
कवि डॉ. जितेंद्र कौशिक ने कहा कि चुभन कुछ इस तरह से उठती है भीतर , जलन अब तो नित्य ही डसने लगी है। राजकुमार वर्मा ने कहा कि जब तक रहे थे क्वारे, अपने मजे बड़े थे, अब कोसते हैं वो दिन, घोड़ी पे जब चढ़े थे। नरेंद्र सिंह ‘निहार’ ने कहा कि आई होली होली आई, मतवालों की टोली आई। सुचि शर्मा ने कहा कि नफ़रत के सब दाग मिटा कर प्यार का गहरा रंग भरें। शुद्ध और पावन रंगों से होली का शृंगार करें। कुमार शिवेंद्र ने कहा कि प्यार की चढ़ी है भंग, मच रहा हुड़दंग। प्रेमियों की प्रीत लिए, फिर होली आई है।
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कवि प्रतीक शुक्ल ने कहा कि इस मर्तबा हम होली मनाएंगे कैसे, जो मोल लाए रंग, लगाएंगे कैसे, उड़ पाएगा कैसे हवा में रंग। कवि अशोक राठौर ने कहा कि नहीं भूलती अब तक यारो, बचपन की आवारा होली, बुरा लगे या भला किसी को, खेली ठेठ गंवारा होली। कुमारी कैरन जेहरावों ने कहा कि रंगों से जो हमें रंग दे, उसे होली कहते हैं, मिटाकर सारे दु:ख जो हमें ख़ुशी से भर दे उसे होली कहते हैं। सत्येंद्र शर्मा तरंग ने कहा कि धरा झूमे गगन नाचे करे शृंगार जग सारा। दिवस होली बहाएगी बस, सभी में प्रेम की धारा। तपस कुमार अग्रवाल ने कहा कि खूब उड़ेगा रंग हवा में अबकी बारी होली में और घुलेगा प्रेम हवा में अबकी बारी होली में। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सत्यराज रहे। अध्यक्षता दिनेश चंद अग्रवाल ने की।
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