बाग प्रकरण में डीएम ने डीएफओ को भेजा पत्र
बिजनौर। शहर में आम के बाग को लेकर आए एनजीटी के आदेश पर प्रशासन भी हरकत में आ गया है। डीएम उमेश मिश्रा ने डीएफओ डॉ. अनिल पटेल को पत्र लिखकर अब तक हुई कार्रवाई पर जवाब मांगा है। साथ ही एनजीटी के आदेश और आम के बाग को वन स्वरूप घोषित करने को लेकर अब तक हुई कार्रवाई पर भी रिपोर्ट मांगी है। वन विभाग के अधिकारी एनजीटी के आदेश के बाद सरकार द्वारा बनाए गए वन स्वरूप नियमावली को खंगालने में जुटे हैं।
बिजनौर के इस बाग में चार हजार से अधिक आम के पेड़ खड़े हैं। इसमें कुछ भूमि निजी नाम पर है तो कुछ एक फर्म के नाम पर है। यदि अभिलेखों की बात करें तो इस बाग का एक बड़ा हिस्सा पुराने अभिलेखों में सिलिंग में दर्ज है। इसी सिलिंग को लेकर फर्म और सरकार के बीच हाईकोर्ट में केस चल रहा है। जो आज भी विचाराधीन है। फर्म जहां अपना दावा ठोकती है, वहीं प्रशासन नियमों के तहत इस जमीन को सिलिंग में घोषित करने की बात कहकर अपना पक्ष मजबूत करने का दावा करता आ रहा है। धीरे-धीरे कुछ जमीन की बिक्री शुरू हुई तो लगातार उधर से पेड़ भी कटने लगे। इसे लेकर शहर के ही विदित कुमार ने एनजीटी में याचिका दायर की थी, जिसे लेकर एनजीटी ने पिछले दिनों एक आदेश दिया था। जिसमें डीएफओ को कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 1996 के आदेश के तहत इस बाग को वन स्वरूप घोषित करने के लिए नियमानुुसार कार्रवाई की जाए। हालांकि अकेले वन अधिकारी ही इस पर निर्णय नहीं ले सकते, इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में एक समिति बनी है, जिसके बीच इस पर चर्चा होनी है। डीएम उमेश मिश्रा ने डीएफओ डॉ. अनिल पटेल को पत्र लिखकर एनजीटी के आदेश पर अब तक हुई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी है। वन अधिकारी अब इस पर सरकार के पुराने नियमों की फाइल खंगालने में लगे हुए हैं।
केमिकल की शिकायत पर जताई चिंता
पिछले सप्ताह विदित कुमार ने एसडीएम सदर के यहां पत्र देकर बाग में खड़े कुछ पेड़ों को केमिकल से सुखाने का आरोप लगाया था। इसे लेकर भी डीएम उमेश मिश्रा ने चिंता जताई है और वन अधिकारियों से इसकी संभावनाओं पर जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि डीएफओ से इस बारेे में पूछा गया है। यह मामला गंभीर है। इसके हर पहलू के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।