नगीना के गांव जलालपुर में वन विभाग के कर्मचारियों से अब तक कार्यों के बारे में जानकारी लेते डीए
- डीएम ने वन विभाग के प्रयासों को बताया नाकाफी, संसाधन बढ़ाने के दिए निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना (बिजनौर)। तेलीपुरा में युवक को मारने वाले नरभक्षी गुलदार की सात दिनों से वन विभाग की टीम को लोकेशन तो नहीं मिली है। आसपास के गांवों में गुलदार की दस्तक खूब परेशान कर रही है। बृहस्पतिवार को डीएम ने वन विभाग के अधिकारियों से वार्ता की और उनके प्रयासों पर असंतोष व्यक्त किया।
क्षेत्र के ग्राम जलालपुर में गुलदार के हमले में एक 20 वर्षीय युवक की मौत के बाद हमलावर गुलदार को पकड़ने के लिए मैदान में उतरी वन विभाग की टीम सात दिन बाद भी खाली हाथ है। इस दौरान रेहड़ व कोतवाली थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में गुलदार ने एक युवती व एक बुजुर्ग को मार डाला। वन विभाग ने क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में साती टीमें बनाकर जंगल की खूब खाक छानी, लेकिन नजीता शून्य रहा। चार दिन तक सुलोचना व डायना हथिनी 39 किलोमीटर जंगल में घूमीं, लेकिन गुलदार चिह्नित नहीं हुआ। बुधवार दोपहर सुलोचना के पैर में सूजन आ जाने के कारण बृहस्पतिवार को दोनों हथिनी कांबिंग के कार्य में नहीं गईं।
बृहस्पतिवार को दोपहर जिला अधिकारी उमेश मिश्रा जलालपुर के उस आश्रम में पहुंचे जहां वन विभाग के अधिकारियों ने अपना कैंप कार्यालय बना रखा है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों द्वारा अब तक किए गए कार्य पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिस किसी भी संसाधन की कमी है उसको वह पूरा कराएंगे, लेकिन उन्हें रिजल्ट मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन विभाग को पुलिस व राजस्व का पूरा सहयोग मिलेगा तथा ग्राम सुरक्षा समिति को सक्रिय करते हुए सभी गांव में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। उन्होंने शासन स्तर पर वन विभाग के कर्मचारियों को अधिक संसाधन व अन्य टीमें उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिया। इस मौके पर एसडीएम शैलेंद्र कुमार सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी संग्राम सिंह भी मौजूद रहे।
भारतीय किसान यूनियन के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष बलजीत सिंह ने बताया कि ग्राम अलीपुरा जट व नियामतपुर में गुलदार को देखे जाने की सूचना मिली थी। उन्होंने बताया कि अलीपुरा जट में ग्रामीणों ने जंगल में रात भर गुलदार को खड़ा पाया, जबकि नियामतपुर में एक बाग में गुलदार सोता हुआ दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार गुलदार दस्तक दे रहा है, जबकि वन विभाग के कर्मचारी किसी भी गुलदार को अभी तक चिह्नित नहीं कर पाए हैं।