बिजनौर में जिले की सफाई व्यवस्था बेहाल है। सड़क किनारे गंदगी के अंबार लगे रहते हैं। नगर पालिकाएं, पंचायतें व गांवों का कूड़ा सड़क किनारे डाला जा रहा है। जिले के अधिकारी भले ही इस बात को नकारते हैं, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा सफाई पर कराए गए सर्वे में यह बात साबित हो गई है। सफाई पर हुए सर्वे में केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए देश के टॉप सबसे साफ 440 शहरों में बिजनौर को शामिल नहीं किया गया है। केंद्र सरकार की यह सूची नगर पालिकाओं व गांवों का कच्चा चिट्ठा खोलने के लिए काफी है।
केंद्र सरकार ने जिलों की सफाई को देखने के लिए सर्वे कराया गया है। सर्वे में शहरों की सफाई व्यवस्था, कूड़ा निस्तारण आदि के आधार पर मार्क दिए गए हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को देश का सबसे साफ शहर माना गया है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दो हजार अंकों में से इंदौर को 1808 अंक मिले हैं। केंद्र ने 440 शहरों की सूची शामिल की है। इस सूची में बिजनौर को शामिल नहीं किया गया है। केंद्र की रिपोर्ट में बिजनौर में इतनी सफाई नहीं मिली कि इसे सूची में शामिल किया जा सके।
जिले में 12 नगर पालिका व छह नगर पंचायतें हैं। जिले की सफाई की जिम्मेदारी करीब तीन हजार से अधिक सफाई कर्मचारियों पर है। सफाई व्यवस्था का जायजा लेने के लिए हर नगर पालिका व पंचायतों में सफाई निरीक्षक व अधिशासी अधिकारी हैं, लेकिन फिर भी हर ओर गंदगी ही दिखाई देती है। हर पालिका क्षेत्र में शहर के बाहर जाने वाली हर रोड पर गंदगी के ढेर लगे होते हैं। अधिकतर स्थानों पर नगर पालिका के कर्मचारी ही कूड़ा पलटते हैं। बाद में इस कूड़े में चोरी छिपे आग लगाकर पर्यावरण प्रदूषण भी फैलाया जा रहा है। स्कूल-कॉलेजों के पास तक कूड़ा डाला जा रहा है। बाजार में भी दुकानों के सामने कूड़ा जमा रहता है।
कूड़ा निस्तारण को नहीं जमीन
कूड़ा निस्तारण के लिए शायद किसी भी नगर पालिका या पंचायत के पास जमीन नहीं है। शासन द्वारा जमीन चिह्नित करने के लिए कहा भी जाता है तो पालिका के अधिकारी प्रोजेक्ट बनाकर तो भेज देते हैं, लेकिन जमीन खरीदवाने की कोशिश नहीं करते हैं। अफसर भी सर्किल रेट पर ही जमीन खरीदना चाहते हैं तो किसान जमीन बेचने को तैयार नहीं होते हैं।
शहरों की सफाई में जिले में हर करीब तीन हजारी कर्मचारी नियुक्त हैं। एक अंदाजे के अनुसार इनके वेतन व अन्य संसाधनों पर हर महीने पांच करोड़ से ज्यादा रुपये लगते हैं, लेकिन फिर भी कूड़ा सड़क किनारे ही पड़ा दिखाई देता है।
नागरिक भी लगाते हैं अड़ंगा
सफाई व्यवस्था में कभी कभी नागरिक भी अड़ंगा लगाते हैं। नागरिक अपनी दुकान या मकान के आगे डस्टबिन नहीं रखने देते। पालिका कर्मचारी डस्टबिन रख भी देते हैं तो उसे रात को तोड़ दिया जाता है।
बीमारियों पर रोक नहीं
शहरों में मलेरिया, डेंगू की रोकथाम के लिए नालियों में एंटी लार्वा दवा के छिड़काव का दावा किया जाता है, इसके बाद भी इन बीमारियों पर रोक नहीं लगती।
सफाई में गांव निकले शहर से आगे
गांवों में अभियान चलाकर खुले में शौचमुक्त बनाया जा रहा है व डस्टबिन रखे जा रहे हैं, लेकिन नगरों में जनता को सफाई से जोड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा। सफाई में गांव शहरों से आगे निकल रहे हैं।
स्कूलों में नहीं पहुंचते सफाईकर्मी
परिषदीय स्कूलों में भी साफ-सफाई खुद शिक्षक ही करते हैं। सफाई के लिए कर्मचारी स्कूलों में नहीं जाते हैं। शिक्षक और बच्चे ही स्कूल में सफाई करते हैं।
गंदे पानी के निस्तारण के लिए भी अब तक कोई कार्ययोजना नहीं बनाई गई है। यह पानी किसी न किसी तरह नदियों में मिला दिया जाता है।
कहीं नहीं सफाई
बिजनौर के मोहल्ला काजीपाड़ा निवासी रुही मोहसिन का कहना है कि शहर में कहीं भी सफाई दिखाई नहीं देती। सफाई कर्मचारियों का मन होता है तो सफाई करने आते हैं वर्ना नहीं आते।
चाहशीरी निवासी राधेश्याम के अनुसार जनता की मेहनत की कमाई सफाई में जाती है, लेकिन सफाई कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। अफसर भी अपने एसी कमरों में बैठकर आंखें बंद कर लेते हैं।
कमी को दूर करेंगे : एडीएम
एडीएम प्रशासन मदन सिंह गर्ब्याल के अनुसार जिलास्तर से हर शनिवार को सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सफाई में कहीं कमी है तो उसे दूर किया जाएगा। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था जल्द की जाएगी।