कादराबाद। क्षेत्र में विस्थापितों के गांवों को कैबिनेट की बैठक में मालिकाना हक मिलने की घोषणा के बाद भी उनकी समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। किसानों व ग्रामीणों ने एसडीएम को एक एकड़ के स्थान पर मूल कब्जे के आधार पर ही कब्जा दिलाने के लिए मांग पत्र सौंपा तथा सरकार की मंशा के अनुरूप एक एकड़ भूमि पर एक व्यक्ति को कब्जा देने की बात को नकार दिया।
भारत के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से विस्थापित होकर लोग धामपुर व नगीना तहसील के में आकर बस गए थे। इनके करीब 17 गांव हैं। इन्हें भूमि पर मालिकाना हक देने के लिए कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल गई है लेकिन ग्रामीण मास्टर गुरदयाल, सुखदेव सिंह, सुखविंदर सिंह, लक्खा सिंह, राजकुमार आदि का कहना है कि सरकार का विस्थापित गांव की भूमि में से मात्र एक एकड़ भूमि पर कब्जा दिए जाने का प्रस्ताव है। इससे ग्रामीण व किसान परेशान हैं।
बुधवार को गांव भोगपुर पंचायत घर में एसडीएम नगीना विजय शंकर व तहसीलदार अमर पाल ने राजस्व टीम के साथ पहुंचकर ग्रामीणों को सरकार की मंशा के अनुरूप एक एकड़ भूमि पर मालिकाना हक दिलाए जाने के संबंध में वार्ता की। इसे ग्रामीणों ने नकारते हुए मूल कब्जे के आधार पर ही कब्जा दिलाए जाने की मांग रखी। इस संबंध में मांग पत्र एसडीम को सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव में भी किसी किसान का कब्जा हटाकर दूसरे किसान को उसकी भूमि पर कब्जा दिलाया जाएगा, इससे वहां शांति भंग की प्रबल संभावना रहेगी। कब्जा हटने पर लोग परेशान होंगे और गांव में झगड़े बढ़ने की भी संभावना रहेगी। ग्रामीणों ने मूल कब्जे के आधार पर ही मालिकाना हक की मांग की है। विस्थापित होकर आए परिवारों के धामपुर तहसील में कटरामल, रसूलपुर आबाद, प्रेमपुरी, कल्लूवाला, धारा फार्म आदि गांव हैं तथा नगीना तहसील के मदपुरी, चंपतपुर चकला, कुआं खेड़ा, भोगपुर आदि गांव शामिल हैं।