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Bijnor News: दरकी नहर पटरी सड़क, कदम-कदम पर गड्ढे ही गड्ढे

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- करीब ढाई साल पहले किया गया था नहर पटरी पर सड़क का निर्माण
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- नजीबाबाद से लेकर बरुकी और झालू तक सड़क ही हालत बदहाल



संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। 40 किलोमीटर लंबी नहर पटरी की सड़क मियाद पूरी होने से पहले ही दरक चुकी है। कदम कदम पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। बदहाल हालत में पहुंची इस सड़क को फिलहाल गड्ढामुक्त अभियान में भी शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में अभी सालों तक राहगीरों को गड्ढों में झटके खाने पड़ेंगे।
नजीबाबाद के सरवनपुर गांव के पास से नहर पटरी पर सड़क बनी हुई है, जो आलोपुर उमरी से होते हुए बरुकी तक पहुंचती है। बरुकी तक इसकी लंबाई 28 किलोमीटर है, जबकि बरुकी से झालू तक दूरी 12 किलोमीटर। चालीस किलोमीटर लंबी इस नहर पटरी सड़क में गहरे गहरें गड्ढे हो गए हैं। बता दें कि इस नहर पटरी सड़क को बाईपास के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। पचास से अधिक गांव की लाइफ लाइन भी यह नहर पटरी सड़क बन चुकी है।
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इस सड़क का निर्माण सिंचाई विभाग की ओर से करीब ढाई साल पहले कराया गया था। कुछ दूरी में निर्माण नजीबाबाद सिंचाई खंड और सड़क का कुछ हिस्सा प्रांतीय नहर सिंचाई खंड ने कराया था। उस वक्त लोगों को लगा कि सड़क बनने से उनकी मुश्किलें आसान हो गई हैं। मगर, कुछ ही महीनों बाद इसमें गड्ढे बनने शुरू हो गए थे। अब ये गड्ढे गहरे हो चुके हैं, जिनसे हादसे हो रहे है।

निर्माण के साथ ही हुआ था टूटने से बचाने का प्रयास
नहर पटरी सड़क ज्यादा दिनों तक टिकी रहे, इसके लिए निर्माण के बाद ही प्रयास किए गए थे। निर्माण के बाद सड़क पर लोहे के पिलर लगा दिए गए थे, जिससे ओवर लोड वाहन या भारी वाहन इस सड़क पर प्रवेश नहीं कर पाए। हालांकि बाद में इन पिलरों की वजह से हादसे हुए तो उन्हें उखाड़ लिया गया था। इन पिलरों के अंदर से छोटे वाहन ही सड़क पर प्रवेश कर सकते थे।

राहगीरों की जुबानी
लक्की धीमान का कहना है कि सड़क में गड्ढों की वजह से हादसों का खतरा बना रहता है। गड्ढोंं में बाइक फिसलने से कई लोग चोटिल हो चुके हैं।

निरुल चौधरी ने बताया कि नहर पटरी की सड़क पर बाइक सवारों को ज्यादा दिक्कत होती है। अचानक से गड्ढा दिखाई देता है और तेज रफ्तार बाइक से गिरने का खतरा बन जाता है।

शुभम मौर्य ने बताया कि पहले सड़क ठीक थी लेकिन अब कुछ महीनों से हालत ज्यादा खराब है। दिन में तो ज्यादा नहीं लेकिन रात में या बरसात के समय गड्ढे दिखाई नहीं देते हैं।
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विभाग का दावा ओवरलोड ने तोड़ी सड़क
सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता विकास अग्रवाल ने बताया कि इस सड़क से गन्ने से लदे ओवर लोड ट्राले और ट्रक निकलते हैं। ओवर लोड की वजह से ही यह सड़क टूटी है। सड़क निर्माण के चार साल बाद ही गड्ढे भरवाए जा सकते हैं या मरम्मत कराई जा सकती है।
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