व्यवस्था सुधारने के लिए लिया गया फैसला
मौलाना हुसैन हरिद्वारी ने कहा कि पिछले कई वर्षों से मदरसों को यह सलाह दी जा रही थी कि वे अरबी की शुरुआती कक्षाओं में छात्रों को बेहतर तालीम दें और इसके बाद ही उन्हें दारुल उलूम भेजें। लेकिन इस पर गंभीरता से अमल नहीं हो पा रहा था।
दारुल उलूम में प्रवेश की संभावना को देखते हुए बड़ी संख्या में छोटे छात्र यहां आ जाते हैं, जिनका काफी समय लग जाता है। प्रवेश न मिलने पर वे वापस अपने पुराने मदरसों में भी नहीं लौट पाते, जिससे उनका शैक्षणिक नुकसान होता है।
स्थानीय छात्रों को दी गई छूट
नई व्यवस्था के तहत देवबंद के स्थानीय छात्रों, दारुल उलूम के उस्तादों और कर्मचारियों के बच्चों को अरबी की छोटी कक्षाओं में प्रवेश की छूट दी गई है। प्रबंधन का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत और व्यवस्थित होगी।