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संघर्ष से पहले हार : नहीं झेल पा रहे जिंदगी का दबाव

Fri, 07 Nov 2025 11:50 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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बिजनौर। दौर बदला तो लोगों में संघर्ष करने की क्षमता भी कम हो गई। संघर्ष से पहले ही हार मानकर लोग आत्महत्या जैसा खतरनाक कदम उठा रहे हैं। जिले में आए दिन आत्महत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं।
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शुक्रवार को भी शहर कोतवाली में 35 वर्षीय युवक ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। लोग बामारी, प्रेम प्रसंग, कर्ज, पढ़ाई से परेशान, पारिवारिक हिंसा सहित अन्य समस्याओं की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं। जिले में साल 2024 में करीब 90 लोगों ने आत्महत्या की थी। जबकि, इस साल करीब 50 लोगों ने आत्महत्या की। मानसिक रोग विशेषज्ञ लोगों को अपनी परेशानी परिवार के साथ साझा करने की सलाह दे रहे हैं।
केस नंबर एक : दारानगर निवासी 19 वर्षीय निखिल और पड़ोस में ही रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी का शव दो नवंबर को गांव लक्शीवाला के पास आम के बाग में पड़ा मिला। दोनों के बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों के गले में रस्सी का फंदा पड़ा था।
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केस नंबर दो : शेरकोट के गांव वाजिदपुर में रुचि का 28 अक्तूबर को अपनी सास भूरी से विवाद हो गया। इसके बाद रुचि अपने घर से निकल गई। कुछ देर बाद रुचि ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
केस नंबर तीन : बिजनौर की कांशीराम कॉलोनी निवासी 22 सुहेल ने अक्तूबर 2025 में जहर खाकर आत्महत्या कर ली। सुहेल और पड़ोस में ही रहने वाली अधिक उम्र की महिला के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। बात खराब होने पर महिला ने युवक के खिलाफ दुष्कर्म की तहरीर दी थी। इसी दबाव में सुहैल ने आत्महत्या की थी।
केस नंबर चार : बिजनौर सदर तहसील में तैनात नायब तहसीलदार राजकुमार ने तीन सितंबर को अपने सरकारी आवास में लाइसेंसी रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली थी। निजी अस्पताल में नायब तहसीलदार ने दम तोड़ दिया था।
केस नंबर पांच : गंगा बैराज से तीन नवंबर की सुबह चांदपुर तहसील में तैनात अमीन वेद प्रकाश की बेटी ललिता सिंह ने नदी में छलांग लगा दी। युवती कानपुर आईआईटी से बीटेक करने के बाद यूपीएससी की तैयारी कर रही थी।
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