बिजनौर के जलालपुर गांव भरैकी के पास नहर में कूदी महिला का 36 घंटे बाद शव मिल गया। जबकि उसके दोनों बेटों का अभी कोई सुराग नहीं मिला है। बैराज से बुलाए गए पांच गोताखोर उनकी तलाश में जुटे हैं।
वहीं, महिला के जलालपुर निवासी मायकेवालों ने भरैकी पहुंचकर उसकी ससुराल में जमकर तोड़फोड़ की और परिजनों को बुरी तरह से पीटा। नहर के पुल पर दोनों पक्षों की महिलाएं मंगलवार को भी आपस में भिड़ गई थीं। उस समय लोगों ने उनमें बीचबचाव करा दिया। नहर से सुरक्षित निकाले गए दीपक की हालत में अब सुधार बताया जा रहा है।
मंगलवार को किरतपुर थाना क्षेत्र के गांव भरैकी निवासी गौरव की 25 साल की पत्नी सुनीता पति से विवाद के बाद अपने पांच साल के बेटे ललित, तीन साल के बेटे दीपक और तीन माह के बेटे आकांशु को लेकर गांव के पास स्थित नहर के पुल पर पहुंची। ललित और दीपक को नहर में फेंकने के बाद आकांशु के साथ उसने नहर में छलांग लगा दी।
पास के खेत में काम कर रहे मेहर ने नहर में कूदकर दीपक को बाहर निकाल लिया था। तभी से नहर में सुनीता और उसके दोनों बेटों की तलाश की जा रही थी। गंगा बैराज से पांच गोताखोरों को बुलाया गया। मंगलवार से लेकर बुधवार शाम तक ये गोताखोर नहर में तीनों को तलाश करते रहे। इस दौरान नहर का पानी भी बंद कराया गया।
गांव दूधली, पैमार, हैबतपुर, भरैकी और दूधला के लोग भी उनकी तलाश में लगे रहे। बुधवार शाम नहर का पानी करीब तीन फीट कम हो गया। जिसके बाद महिला का शव मिल गया। दोनों बच्चों की तलाश में गांव वालों ने गांव दूधला में नहर के पुल पर जाल भी लगाया है। शाम तक लोग दोनों बच्चों की तलाश में जुटे रहे, लेकिन उनका कहीं सुराग नहीं मिला।
उधर, गौरव के पिता पतराम के मुताबिक मंगलवार शाम सुनीता के शहर कोतवाली के गांव जलालपुर निवासी मायके वाले ट्रैक्टर ट्रॉली से गांव भरैकी पहुंचे और उन्होंने उनके घर में जमकर तोड़फोड़ की। पतराम की बेटी शानू को बुरी तरह पीटा। सुनीता के घर का सामान ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर ले गए।
पुलिस ने किसी तरह गौरव के घर से उन्हें खदेड़ा। रास्ते में गांव वालों के बीच पतराम भी खड़ा था। मायके वालों ने उसे भी पीटा। बुधवार को नहर के पुल पर तीनों को तलाश करने के दौरान दोनों पक्षों की महिलाएं फिर से भिड़ गई। लोगों ने उन्हें शांत किया।
मायके वालों का आरोप था कि ससुरालवाले सुनीता को बेवजह पीटते थे। पति गौरव भी उसे पीटता था। कई बार उन्होंने समझा बुझाकर सुनीता को ससुराल भेजा था। इस वजह से ही सुनीता ने ये कदम उठाया है। मायके वालों की ओर से थाने में कोई तहरीर नहीं दी गई है।