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टेंडर के फेर में फंसा आंकड़ा संग्रह प्रपत्र

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टेंडर के फेर में फंसा आंकड़ा संग्रह प्रपत्र
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बिजनौर। समग्र शिक्षा अभियान के तहत भरवाए आंकड़ा संग्रह प्रपत्र का प्रकाशन नहीं होने से शिक्षक परेशानी में हैं। शासन से आई 13 लाख की धनराशि को खुर्द-बुर्द करने का खेल हो रहा है। बीईओ स्तर से टेंडर न होने के बावजूद ऑनलाइन डाटा फिडिंग का कार्य चल रहा है। बीएसए कार्यालय में 20 जुलाई डाटा फिडिंग के लिए अंतिम तारीख तय की है।
बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित परिषदीय व मान्यता प्राप्त स्कूल को वर्ष में एक बार जिला शैक्षिक सूचना-प्रणाली का कार्य किया जाता है। आंकड़ा संग्रह प्रपत्र विद्यालय को खंड शिक्षा अधिकारी स्तर से प्रकाशित होकर प्राप्त होता है। जिस पर विद्यालय से सूचना संग्रह होकर फिडिंग का काम किया जाता है। वर्ष 2021-22 के आंकड़ा संग्रह प्रपत्र की फिडिंग का काम ब्लॉक स्तर पर शुरू हो गया है, लेकिन अभी तक आंकड़ा संग्रह प्रपत्र विद्यालय को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। शासन ने वर्ष 2021-22 में आंकड़ा संग्रह प्रपत्र के लिए 13 लाख रुपये जिले भर के 11 ब्लॉक पर भेजे थे। आंकड़ा संग्रह प्रपत्र के प्रकाशन का काम जैम पोर्टल के माध्यम से खंड शिक्षा अधिकारी स्तर पर होना था, लेकिन अभी तक खंड शिक्षा अधिकारी स्तर से जैम से आंकड़ा संग्रह प्रपत्र का टेंडर नहीं हो पाया और फिडिंग का काम जोरों पर है। बिना प्रपत्र के ऑनलाइन फिडिंग का काम फर्जी तरीके से चल रहा है। फिडिंग में विद्यालयों का आंकड़ा फर्जी फीड किया जा रहा है।
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जिले के कई खंड शिक्षा अधिकारियों ने आंकड़ा संग्रह प्रपत्र को वेबसाइट से डाउनलोड कर पीडीएफ में शिक्षकों को दे दी है। शिक्षक आंकड़ा संग्रह प्रपत्र का प्रकाशन और फिडिंग का काम खुद कर रहे हैं। इसमें शिक्षकों के पसीने छूटे हुए हैं। शासन से आई धनराशि को खुर्द-बुर्द करने का खेल चल रहा है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी धर्मेंद्र सिंह ने अभी तक शिक्षकों के प्रपत्र नहीं आने के मामले की जांच करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि गत वर्षों में प्रपत्र फिडिंग से पहले उपलब्ध हो जाता था। संघ के जिला महामंत्री प्रशांत सिंह ने बताया कि आंकड़ा संग्रह प्रपत्र उपलब्ध नहीं होने के बावजूद फिडिंग का कार्य ऑनलाइन शिक्षकों से कराना गलत है। शिक्षकों के पास उतने संसाधन नहीं हैं, जिससे की वह फिडिंग का काम कर सकें।
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