बिजनौर में दो साल से मानसून की बेरुखी झेल रहे लोग एकतरफ जल्द ही बारिश होने की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं, गंगा के तटीय गांव वाले बारिश के नाम से ही सिहर रहे हैं। वजह है पहाड़ों पर होने वाली बारिश से गंगा के तटीय गांवों में आने वाली बाढ़।
बाढ़ की आशंका का गांव वालों का डर बृहस्पतिवार को सांसद भारतेंद्र सिंह के साथ जांच के लिए गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के अधिकारियों के सामने भी आ गया। गांव वालों ने उनकी जान बचाने की दुहाई देते हुए गांवों के पास तटबंध बनवाने की मांग की है।
खादर में गंगा की धारा के पूरब की ओर यूपी और पश्चिम की ओर उत्तराखंड के गांव हैं। पहाड़ों पर बारिश होने से पहले पानी दोनों राज्यों के गांवों में फैल जाता था। हालांकि उत्तराखंड सरकार ने गांव डूमनपुरी के पास तटबंध बना लिए। अब अगर बारिश ज्यादा होगी तो बिजनौर के गांव कुंदनपुर टीप, रामपुर ठकरा, मिर्जापुर, डैबलगढ़, सीमली, कोहरपुर, राजारामपुर, रावली, ब्रह्मपुरी आदि गांव बाढ़ की जद में आने का पूरा अंदेशा है।
गंगा द्वारा बरसात में यहां पर कटान भी किया जाता है। इसके बारे में भारतेंद्र सिंह ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती को बताया था। बृहस्पतिवार को गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग लखनऊ के निदेशक विवेक पाल, सदस्य गोरख ठाकुर व सिंचाई विभाग मुरादाबाद के मुख्य अभियंता एमपीएस वर्मा ने सांसद भारतेंद्र सिंह के साथ गांव नवलपुर बैराज, डैबलगढ़, टीप, सीमली जाकर गांव वालों से वार्ता की।
गांव नवलपुर बैराज की बन्नो देवी ने बताया कि पहाड़ों की बारिश उनके गांव को डूबा देती है। 2013 में भी गांव में इतना पानी भरा था कि घर छोड़कर सड़कों पर रहना पड़ा था। अब हालत इससे भी खराब हो सकती है।
ग्राम प्रधान किशोर ने बताया कि इस बार बारिश अधिक होने के बारे में सुन रहे हैं। अगर तटबंध न बने तो उनको बाढ़ का कहर झेलना होगा। बाकी गांव वाले भी बाढ़ के अंदेशे से सहमे दिखे। उन्होंने क्षेत्र में गंगा किनारे तटबंध बनाने की मांग की। गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के निदेशक विवेक पाल के अनुसार गांव वालों से वार्ता की है।
इस संबंध में रिपोर्ट बनाकर मंत्रालय को भेजी जाएगी।