बासमती धान की बालियों में नहीं पड़े दाने।
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बिजनौर जिले में बासमती धान की बीपी-6 प्रजाति से दाना (चावल) नहीं निकलने का मामला शासन तक गूंजने से अफसरों में हड़कंप मच गया। प्रमुख सचिव (कृषि) रजनीश गुप्ता नेे इस मामले की जांच कृषि निदेशक ज्ञान सिंह को सौंपी है। जांच में यह पता किया जाएगा कि फसल का शून्य उत्पादन एकदम कैसे हो गया। सोमवार को इस मामले में मुरादाबाद कृषि निदेशक जितेंद्र तोमर ने नजीबाबाद क्षेत्र के अनेक गांवों में पहुंचकर नुकसान के बारे में पता किया।
ईरान को बासमती चावल के निर्यात पर रोक हटने के बाद जिले के किसानों ने बासमती चावल की बीपी-6 प्रजाति प्रमुखता से बोई थी। एक अनुमान के अनुसार जिलेभर में इस प्रजाति का बीज करीब 25 हजार बीघा जमीन में बोया गया था। अधिकांश किसानों को कृषि विभाग ने ही बीज उपलब्ध कराया था। धान की फसल खेत में लहराते देखकर किसान भी खुश थे। हालांकि जब फसल कटने का नंबर आया, तो किसानों के होश उड़ गए। धान की बालियों में दाना नहीं पड़ा था। अब किसान इस स्थिति में भी नहीं हैं कि अपने खेतों में दाने से खाली खड़ी फसल को कटवा सकें। जिले के कृषि विभाग के अधिकारी मौसम प्रतिकूल होने व खेतों में पोटाश की कमी होने को दाना नहीं पड़ने की वजह बता रहे हैं। किसान उनको घटिया बीज बेचने का आरोप लगा रहे हैं। भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने प्रमुख सचिव (कृषि) रजनीश गुप्ता को अवगत कराया है।
उन्होंने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने इस मामले की जांच कृषि निदेशक ज्ञान सिंह को सौंपी है। बुधवार को मुरादाबाद कृषि निदेशक जितेंद्र तोमर ने नजीबाबाद क्षेत्र के गांव हुसैनपुर तिरगर सहित अनेक गांवों में जाकर धान की फसल में नुकसान हुआ। उन्होंने किसानों से धान की फसल के नुकसान के बारे में किसानों से बात की। किसानों ने उनको फसल में हुए नुकसान के बारे में बताया।
बिजनौर में धान का बाजार किसानों पर मेहरबान नहीं है। बाजार में धान के दाम सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य से काफी कम हैं। हालांकि नकद धनराशि के लिए किसान बाजार में भी धान बेचने को मजबूर हैं। धान की फसल पककर किसानों के घरों में आ चुकी है। फसल पैदा करने के बाद किसान उसे बाजार या सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचते हैं। बरसात अच्छी होने से धान की कई प्रजातियों की फसल बहुत अच्छी हुई है। इस साल सरकार द्वारा धान का मूल्य 1450 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। क्रय केंद्रों पर किसान द्वारा बेचे जाने वाले धान का किसान को भुगतान चेक द्वारा दिया जाता है। बाजार में किसान को नगद भुगतान मिलता है। हालांकि बाजार में धान की कीमत काफी कम दी जा रही है। बाजार में किसान को धान की कीमत 1100 से 1150 रुपये प्रति क्विंटल तक दी जा रही है।नगद धनराशि के लिए किसान बाजार में फसल बेच रहे हैं। भाकियू जिला महासचिव दिगंबर सिंह के अनुसार क्रय केंद्रों पर किसानों के धान में 100 कमी निकालकर उसे रिजेक्ट किया जा रहा है। इसलिए किसान अपनी फसल बाजार में कम कीमत पर ही बेचने को मजबूर हो रहे हैं।