एएसपी सिटी डॉ. प्रवीन रंजन सिंह ने बताया कि जिस कंपनी से संपर्क किया गया है, उसने लखनऊ की साइबर लैब बनाने और पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने का काम किया है। फिलहाल कंपनी से डीपीआर बनाने के लिए कहा गया है। जिससे बजट की डिमांड करते हुए जल्द से जल्द लैब बनाई जा सके। लैब बनाने के लिए बाकायदा एक कमरे का निर्माण कर लिया गया है।
लखनऊ की लैब पर नहीं होगी निर्भरता
साइबर क्राइम के मामलों में अभी तक बिजनौर से लखनऊ की लैब को डाटा भेजा जाता है। वहां से जांच रिपोर्ट आने में दो दो महीने तक का वक्त लग जाता है। बिजनौर में ही लैब बन जाने के बाद एक दिन में ही साइबर क्राइम के डाटा को डीकोड कर लिया जाएगा। लैब में फोरेंसिक कंप्यूटर के अलावा अन्य उपकरण भी लगाए जाएंगे।
जिले में फिलहाल हर महीने 20-25 शिकायत साइबर क्राइम की आ रही है। जिन्हें साइबर सेल के हवाले कर दिया जाता है। एक प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी साइबर सेल में तैनात हैं।
बताया जा रहा है कि इन दिनों साइबर अपराधी नौकरी के लिए आवेदन का झांसा देकर फर्जी लिंक डाल रहे हैं। इस महीने ऐसे दो मामले सामने आए। उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी और क्राइम के लिए पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रकम भी गैर राज्यों में स्थित बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है।
जिले में सभी थानों पर साइबर सेल का गठन किया जा चुका है। अब साइबर लैब बनाने के लिए भी कवायद चल रही है। जल्द से जल्द लैब बनाकर चालू करने का प्रयास किया जा रहा है-डॉ. धर्मवीर सिंह, एसपी