वर्चस्व की जंग में ही गई शावक की जान
बिजनौर। शेरकोट में मिली मादा गुलदार शावक की मौत वर्चस्व की जंग में हुई थी। माना जा रहा है कि मादा गुलदार पर गुलदार ने हमला किया होगा। मां के भाग जाने पर गुलदार ने शावक को मार डाला।
वन्य जीवों में इलाके को लेकर वर्चस्व की जंग कोई नहीं बात नहीं है। वर्चस्व की जंग में वन्यजीवों की जान भी चली जाती है। शेरकोट के गांव नंगला दत्ता में 11 फरवरी को एक मादा गुलदार शावक का शव मिला था। शावक करीब 15 महीने का था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि शावक को गला घोंटकर मारा गया था। उसकी गर्दन पर दांतों से बने घाव के निशान भी थे। गुलदार का दुश्मन टाइगर होता है और टाइगर इस क्षेत्र में आमतौर पर नहीं दिखते हैं। यहां पर गुलदार ही घूमते हैं। मादा गुलदार शावक का एक दांत भी टूटा हुआ था। वह दांत पोस्टमार्टम में उसके ही पेट से मिला है। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि मादा गुलदार शावक ने मरने से पहले काफी संघर्ष किया होगा। आमतौर पर मादा गुलदार दूसरी मादा गुलदार या उसके बच्चों को नुकसान नहीं पहुंचाती है, लेकिन वयस्क गुलदार शावक को मार सकता है। डीएफओ एम सेम्मारन के अनुसार शावक के शव पर दांत के निशान मिले हैं। ऐसे बाघ या गुलदार ही अपने शिकार को मारते हैं।