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सांसद को बताई प्रशासन की लापरवाही

Fri, 31 Aug 2018 12:16 AM IST
अमर उजाला/बिजनौर
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स्योहारा के बाढ़ प्रभावित गांव भगवानपुर रैनी का दौरा करते सांसद डा. यशवंत सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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धामपुर में  सांसद डा. यशवंत सिंह ने प्रशासनिक और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ स्योहारा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव भगवानपुर रैनी का दौरा किया। ग्रामीणों से उनका हालचाल पूछा। अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे गांव में रहकर खो नदी में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद करें।
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सांसद को लोगों ने बताया कि खो नदी में आई बाढ़ से उनकी खेतीबाड़ी बर्बाद हो गई है। बाढ़ का पानी गांव में घुसने से लोगों से लाखों की कीमत का सामान नष्ट हो गया है। कई बार एसडीएम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को    अवगत कराया गया। पर किसी ने उनके गांव की ओर से आकर नहीं देखा। वह वर्षाकाल शुरू होने से पहले ही क्षेत्र के विधायक और सांसद एवं सिंचाई विभाग से कटाव निरोधक कार्य कराने की मांग करते आ रहे है। अब जब बाढ़ ने उन्हें बर्बाद कर दिया है तो अधिकारी   और नेताओं की उनका हालचाल जानने वालों की लाइन लगी हुई है। यदि बरसात शुरू होने से पहले कटाव निरोधक कार्य मजबूती के साथ हो गए होते है, उनकी     बर्बादी न होती है। सांसद ने ग्रामीणों की परेशानी को जानने के बाद भरोसा दिया है कि अबकी बार ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। समय से पहले सारे कार्य पूरे होंगे।
एसडीएम ने बाढ़ की किसानों   की फसलों की हुई बर्बादी का आंकलन कर उनकी क्षतिपूर्ति कराने, गांव में भरे पानी की समुचित निकासी की व्यवस्था कराने, टूटे मार्गों की मरम्मत कराने को कहा। सांसद ने कहा कि इस मामले में अधिकारियों की ओर से बरती जाने वाली लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। गांव के लोगों ने बताया कि खेतीबाड़ी की उनकी गुजरबसर का साधन है। लोगों का कहना था कि जब नदी में बाढ़ हर साल आती है तो सरकार को इसकी रोकथाम के उचित बंदोबस्त करने चाहिए। भ्रमण के दौरान एसडीएम कुंवर वीरेंद्र सिंह, सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र प्रजापति, मनोज कुमार, डा. विनीत देवरा आदि रहे।
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हरिद्वार से गंगा में एक लाख 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया
बिजनौर में हरिद्वार से बृहस्पतिवार को गंगा में एक लाख 15 हजार क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इससे गंगा का जल स्तर बढ़ने की संभावना से तटीय गांवों के लोगों की धड़कने बढ़ने लगी है। उधर, मंडावर क्षेत्र के चौहड़वाला के सामने नाव पलटने से डूबे लोगों की खोज में पीएसी ओर स्थानीय गोताखोरों की टीमें अब तक अभियान चलाए हुए है। गंगा में बुधवार को एक लाख 20 हजार क्यूसेक पानी चल रहा था। बृहस्पतिवार को दिन में तीन बजे हरिद्वार से गंगा में एक लाख 15 हजार क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है।  इसने गंगा किनारे बसे गांवाें के ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी है। उन्होंने जल स्तर बढ़ने से पहले ही चौकसी बरतनी शुरू कर दी है। उधर, मंडावर क्षेत्र के गांव डेबलगढ़ के लोग गांव चौहड़वाला के सामने गंगा की उफनती लहरों के बीच नाव पलटने से गंगा में डूबे 28 लोगों में 17 को गंगा से सकुशल बचा लिया गया था। चार महिलाओं के शव मिले थे। बाकी बचे लोगों को गंगा में रोज तलाश जा रहा है। पांच दिन तक कड़ी मशक्कत करने के बाद एनडीआरफ की टीम वापस लौट गई है। बृहस्पतिवार को पीएसी के साथ स्थानीय गोताखोर नाव और टायर के सहारे गंगा में डूबे लोगों को ढूंढते रहे, पर कोई हाथ नहीं आया। मध्यगंगा बैराज के जेई पीयूष कुमार के मुताबिक गंगा में जल स्तर बढ़ गया है। बृहस्पतिवार की दोपहर करीब तीन बजे एक लाख 15 हजार क्सूयेक पानी हरिद्वार से छोड़ा गया है।
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