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बाइक पर जाते भाई-बहन को वाहन ने रौंदा

Wed, 01 Mar 2017 11:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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धामपुर सीएचसी में विलाप करते मृतकों के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
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धामपुर में  हाईवे पर हबीबवाला के पास सड़क हादसे में भाई-बहन की मौके पर मौत हो गई। भाई बाइक से बहन को परीक्षा दिलाने ले जा रहा था। उसकी बाइक की टक्कर किसी वाहन से हो गई। घटना से परिवार में कोहराम मचा है। घटना की मृतका के पिता ने पुलिस को तहरीर दी है। परिवार के सदस्यों के आग्रह पर पुलिस ने दोनों के शवों को बगैर पीएम कराए उनकी सुपुर्दगी में दे दिया है। परिवार में दोनों बच्चों के अलावा और कोई संतान नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक हेलमेट नहीं पहन रखा था।
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 थाना क्षेत्र के गांव बसेड़ा कुंवर निवासी पद्म सिंह ने बताया कि उनका पुत्र अंकुर (23) सहारनपुर में  प्राइवेट नौकरी करता था। अंकुर 28 फरवरी को किसी काम से घर आया था। अंकुर की बहन दीपिका रानी (18) मुरादाबाद में अपने मामा के यहां रहकर पढ़ाई कर रही थी। दीपिका ने बीएससी करने के लिए गांव सरकड़ा चकराजमल के पृथ्वीराज चौहान इंस्टीट्यूट में प्रवेश लिया था। एक मार्च को सवेरे सात बजे से 10 बजे तक प्रथम पाली में उसका पहला पेपर था। दीपिका भी परीक्षा देने को 28 फरवरी को ही अपने मामा के घर से गांव बसेड़ा कुंवर आई थी। बुधवार को जब उनका पुत्र अंकुर अपनी बहन दीपिका को बाइक से गांव सरकड़ा चकराजमाल स्थित पृथ्वीराज चौहान इंस्टीट्यूट में बीएससी प्रथम वर्ष की परीक्षा दिलाने ले जा रहा था। हाईवे 74 पर गांव हबीबवाला के पास पहुंचने पर उसकी बाइक और किसी अज्ञात वाहन से टक्कर हो गई। हादसे के दौरान दोनों भाई-बहन की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों के शवों को कब्जे में लेकर सीएचसी पहुंचाया। पुलिस ने जब आगे की कार्रवाई करने का प्रयास कर रही थी तो सूचना पर पहुंचे मृतकों के परिजनों ने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि उनकी बाइक में किसने टक्कर मारी है, तो ऐेसे में वह किसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट कराएं, इसलिए वे पीएम कार्रवाई नहीं कराना चाहते। कोतवाल मुनीश चंद शर्मा ने उच्च अधिकारियों से फोन पर बात करने के बाद परिजनों से लिखित आग्रह पर दोनों शवों को उनकी सुपुर्दगी में दे दिया है। परिजन दोनों के शव सीएचसी से अपने गांव ले गए। गांव ले जाने के बाद परिजनों से उनका अंतिम संस्कार कर दिया है। 

भाई-बहन की एक साथ अर्थी देख गांववासी गमगीन
गांव में भाई-बहन की अर्थी देख हर किसी गांववासी की आंख से आंसू निकल आए। गांववासियों का कहना था कि अंकुर तो मंगलवार रात किसी की शादी में गया था। बुधवार सवेरे ही लौट कर घर आया था। अंकुुर की पालीटेक्निक करने के बाद नौकरी लगी थी। दीपिका और उसके भाई की सड़क दुर्घटना में मौत होने पर पृथ्वीराज चौहान इंस्टीट्यूट कालेज के प्रबंधन ने भी दुख जताया है।
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अब हमारा क्या होगा
हादसे से माता पिता का रोते हुए बुरा हाल है। पिता पद्म सिंह का कहना है कि दोनों उनकी आंखें थे। अब तो उनकी दोनों आंख ही चली गई । उनके जिंदगी में जो घोर अंधेरा अचानक आया है। ऐसे में वह अब कैसे जी सकेंगे। उनका तो सब कुछ खत्म हो गया। उनके जीवन का यही बच्चे सहारा थे। अब वे किसके सहारे जीवन जीएंगे।

शवों को देेख अधिकारियों की आंखें भी नम
भाई-बहन के सीएचसी में रखे शवों को देख सीओ अशोक यादव और तहसीलदार सुरेश कुमार व अन्य अधिकारियों की आंखें भी नम हो र्गइं। दोनों अधिकारियों ने कोतवाल को बगैर पीएम के पंचनामा भरवाने के बाद उनके शवों को परिजनों की सुपुर्दगी में देने के आदेश दिए।
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