बिजनौर में पुलिस के आला अधिकारी कभी भी दो लाख के इनामी बदमाश मुनीर की गिरफ्तारी के प्रति सक्रियता नहीं दिखाई है। धामपुर में पीएनबी के कैश वैन से 91 लाख रुपये लूट में पुलिस की एक टीम ने मुनीर और सऊद का नाम लेने पर महकमे के अधिकारियों का पारा चढ़ गया था। दावा है कि अधिकारियों ने पुलिस टीम की जमकर क्लास ली थी। इतना ही नहीं दोबारा मुनीर का नाम लूट में नहीं लेने की हिदायत दी थी। ऐसी बेतुकी बातें कभी भी जुबान पर मत लाना। इस पर पुलिस टीम ने चुप्पी साध ली थी। पहले मुनीर यदि पकड़ा जाता तो शायद एनआईए अफसर तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की जान नहीं जाती।
जिले के आला अफसरों की कृपा होने की वजह से इनामी मुनीर बेखौफ घूमता रहा। सूत्रों के मुताबिक जिले के पुलिस महकमे के आला अफसरों के दावे में यह दम नहीं है कि धामपुर के पीएनबी कैश वैन लूट के बाद से पुलिस टीम मुनीर की तलाश में जुटी हुई थी। लूट में अगर पुलिस मुनीर के पीछे पड़ी होती, तो वह खुलेआम तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना का मर्डर करने की हिम्मत नहीं करता। एनआईए अफसर तंजील और उनकी पत्नी फरजाना के मर्डर के बाद ही मुनीर की तलाश में कई जिलों की पुलिस खाक छान रही है। सूत्रों के मुताबिक तंजील मर्डर में पूछताछ के दौरान जब मुनीर के साथियों ने राज उगला तो पुलिस दांतों तले उंगली दबा ली। पुलिस को हिस्ट्रीशीटर के साथियों ने बताया कि बैंक लूट की पुलिस को मुखबिरी करने के शक में ही तंजील का मर्डर हुआ है।
अब तक की कार्रवाई पर भी नजर डाली जाए तो तंजील और उनकी पत्नी के मर्डर में पुलिस के आला अफसरों की नाकामी उजागर हो रही है। हकीकत यही है कि लूट में पुलिस ने मुनीर को पकड़ने में दिलचस्पी ली ही नहीं। उधर एनआईए अधिकारी तंजील अहमद की सनसनीखेज तरीके से हत्या करने वाला शूटर मुनीर अभी तक पुलिस या किसी अन्य जांच एजेंसी के हत्थे नहीं चढ़ सका है। मुनीर ने सभी को छकाया हुआ है। उसकी लोकेशन कभी कभी दिल्ली, कभी लखनऊ तो कभी एनसीआर में मिलती है। मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने वाले मुनीर का इलेक्ट्रानिक सर्विलांस न हो पाने की वजह से जब तक उसकी सूचना पर टीम मौके पर पहुंचती है, वह वहां से निकल चुका होता है।
मुनीर की अलग-अलग जगहों पर लोकेशन मिलने की वजह से एनआईए, एटीएस, एसटीएफ व बिजनौर पुलिस की टीमें उसे दबोचने के लिए अलग-अलग जगहों पर धूल फांक रही हैं। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस न हो पाने की वजह से ही आला पुलिस अफसरों ने मुनीर की गिरफ्तारी पर पहले 50 हजार और फिर दो लाख का इनाम घोषित कर दिया था। अफसरों को उम्मीद थी कि इनाम की रकम बड़ी होने के लालच में कोई न कोई उसकी मुखबिरी कर ही देगा। फिलहाल अफसरों के पास जो सूचनाएं आ रही हैं वह या तो बहुत देर में आ रही हैं या अपुष्ट। वहीं, अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था दलजीत सिंह चौधरी का कहना है कि मुनीर की गिरफ्तारी की कोशिश जारी है और जल्दी ही इस पर अमल भी होगा।
अक्सर मुनीर आता था सहसपुर
पुलिस महकमे की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि धामपुर में 91 लाख रुपये के कैश वैन लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद भी कुख्यात मुनीर सहसपुर अपने घर आकर रहता रहा। अपने घर के परिजनों के साथ ही पिता के संपर्क में बराबर बना रहा। दोस्तों से भी घुलता मिलता रहा। कई ग्रामीणों ने बताया कि कई बार वह सहसपुर आया, लेकिन पुलिस उसकी लोकेशन तक ट्ेस करना मुनासिब नहीं समझा। एनआईए अफसर तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के बाद ही प्रशासनिक मशीनरियां सक्रिय हुई।
अलीगढ़ पुलिस का भी रहमोकरम
बदमाश मुनीर पर अलीगढ़ पुलिस का भी रहमोकरम रहा है। अलीगढ़ पुलिस ने भी दो हत्याओं में वांटेंड चल रहे मुनीर को ढूंढना कभी गवारा नहीं समझा। भले ही अलीगढ़ पुलिस कहती रहे कि मुनीर की तलाश में वह सहसपुर भी आई थी, लेकिन अलीगढ़ पुलिस की यह बात सरासर गलत है। अलीगढ़ पुलिस कभी सहसपुर नहीं आई और न ही मुनीर के बारे में जानकारी करना उचित समझा। अलीगढ़ पुलिस ने यह भी पता करना मुनासिब नहीं समझा कि मुनीर कहां और क्या कर रहा है।
कई जिलों में चल रही है छापामारी
एसपी सुभाष बघेल दावा कर रहे हैं बैंक लूट के बाद से पुलिस मुनीर को ढूंढ रही थी। तंजील के मर्डर वाले दिन अगर वे जिले में होते, तो सबसे पहले मुनीर के घर ही दबिश डलवाते। उन्होंने कहा कि मुनीर की तलाश में कई स्थानों पर दबिशों का दौर जारी है।