बिजनौर। सीजेएम महेशानंद झा ने फतेह बहादुर हत्याकांड में पुलिस द्वारा लगाई गई फाइनल रिपोर्ट को निरस्त करते हुए पांचों आरोपियों को अदालत में 12 अक्तूबर को सुनवाई हेतु तलब किया है।
बिजनौर निवासी लता राठौर ने अगस्त 2012 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके पति फतेह बहादुर शराब पीने की आदत थी। उसी के कारण उसे कोका कोला कंपनी से निकाल दिया गया था। फतेह बहादुर को गंज में डा. मुन्ना ने नशामुक्ति के चक्कर में फंसा लिया तथा उसके गंज स्थित बाग को हड़पने के लिए उसके पति से उसके विरुद्ध तलाक का मुकदमा कायम करा दिया था।
14 जुलाई 2012 को उसके पति फतेहबहादुर ने उसे फोन बताया था कि डा. मुन्ना व उसके साथी कौशल, अनिल, केके शर्मा, हरिशरण उसे मारने का प्लान बना रहे हैं। 15 जुलाई को वह अपने लड़के के साथ डा. मुन्ना के नर्सिंग होम पर गई। वहां सभी आरोपी उसे मौजूद मिले।
लता के अनुसार उसके पति ने उसे बताया कि उसे आरोपियों द्वारा जहर दे दिया गया है और जबरदस्ती एक सोसाइड नोट लिखवा लिया गया है। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। कोर्ट के आदेश पर इसमें पुन: विवेचना के बाद भी पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाई थी।
जिस पर मृतक की पत्नी लता राठौर ने अदालत में फाइनल रिपोर्ट में फिर से आपत्ति प्रस्तुत करते हुए कहा था कि पुलिस ने आरोपियों से मिलकर गलत तौर से फाइनल रिपोर्ट लगाई है। उसने फाइनल रिपोर्ट को निरस्त कराने की अदालत से गुहार की थी। अदालत ने फाइनल रिपोर्ट को निरस्त करते हुए लिखा है कि आरोपियों मुन्ना, अनिल कुमार माहेश्वरी, केके शर्मा व हरिशरण पर अपराध बनता है।