बिजनौर। 12 सितंबर 2014 दिन शुक्रवार को रोज की तरह बिजनौर शहर में लोग अपनी दिनचर्या में लगे हुए थे। दिन में करीब 11 बजे का वक्त था। मोहल्ला जाटान में लीलो देवी के मकान में तेज धमाके के साथ जोरदार विस्फोट ने इलाके को दहला दिया।
लीलो देवी के मकान के आसपास चौतरफा धुआं उड़ता दिखाई दिया। हर कोई लीलो देवी के घर की ओर दौड़ा, किसी की समझ में माजरा नहीं आया। थोड़ी देर में सायरन की आवाज से पुलिस और अफसरों की गाड़ी लीलो देवी के मकान की ओर दौड़ी।
उपचुनाव की तैयारी में लगे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। हर किसी की इस खौफनाक मंजर को देख रूह कांप उठी थी। सब को जब पता चला कि लीलो देवी के मकान में आतंकी रह रहे थे तो सभी के होश उड़ गए। इस मंजर को एक साल बीतने के बाद भी याद करके लोग सिहर उठते हैं।
इस घटना को एक साल हो गया पर देश की सुरक्षा एजेंसी बिजनौर से फरार आतंकियों को नहीं खोज पाई। फरार आतंकियों को जमीन निगल गई या आसमान यह किसी को कुछ नहीं पता।
12 सितंबर 2014 को लीलो देवी के मकान में दिने में करीब 11 बजे के वक्त तेज विस्फोट ने सब को हिला दिया। पड़ोस के लोगों ने मकान में रह रहे तीनों आतंकियों को अपने झुलसे साथी को बाइक से लेकर भागते देखा। किसी को कुछ नही मालूम था कि मकान में आतंकी रह रहे थे।
सभी सुरक्षा एजेंसी जांच-पड़ताल में जुट गई। विस्फोट के बाद भी आतंकी बेखौफ होकर अपने साथी को एक चिकित्सक के यहां उपचार कराने पहुंचे थे। उपचार कराने के दौरान की सारी घटना सीसी कैमरे में कैद हो गई। तब मालूम हुआ कि फरार आतंकी खंडवा जेल से भागे सिमी के आतंकी एजाजुद्दीन, असलम, अकरम, महबूब, सालिक व उमर हैं। देशभर की सुरक्षा एजेंसियों ने बिजनौर में डेरा जमा दिया।
सभी इस बात की खोजबीन में लगे रहे कि आतंकियों का दूसरा ठिकाना भी होगा। प्रशासन इस बात को लेकर परेशान रहा कि 14 सितंबर को बिजनौर विधानसभा सीट पर उपचुनाव था। सभी इस बात को लेकर उलझे रहे कि कहीं विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए तो लीलो देवी के मकान में बम नहीं बनाया जा रहा था।
विस्फोट के एक सप्ताह बाद सुरक्षा एजेंसी मोहल्ला भाटान में आतंकियों का दूसरा ठिकाना ढूंढ पाए। आतंकी तीन दिन उमरी गांव के जंगल में डेरा जमाने के बाद बिजनौर से भाग निकले। इसके बाद आतंकियों की कोई लोकेशन नहीं मिली। पुलिस ने आतंकियों के मददगार हुस्ना, उसके भाई नदीम, रईस, उसके पुत्र अब्दुल्ला व झालू के फुरकान को दबोचा।
हुस्ना व अब्दुल्ला के पास से आतंकियों के डेटोनेटर व अन्य सामान मिला था। झुलसे आतंकी महबूब का क्या हुआ, इसका अभी तक किसी को कुछ पता नहीं चला है। इतना जरूर हुआ कि तीन माह पहले तेलंगाना राज्य में हुई मुठभेड़ में बिजनौर से फरार एजाजुद्दीन व असलम मारे जा चुके हैं।
बिजनौर में छिपे आतंकी मुजफ्फरनगर दंगे का बदला लेने की फिराक में थे। मुजफ्फरनगर में लगने वाला आरएसएस कैंप इनके निशाने पर था। यह बात आतंकियों ने अपने मददगारों से भी बताई थी। फरार आतंकी कहां छिपे हैं, जिंदा हैं या मर गए, यह किसी को नहीं मालूम। सुरक्षा एजेंसी एक साल बीतने पर भी अंधेरे में तीर चला रही है। लीलो देवी के मकान के पास रहने वाले लोग आज भी इस घटना को नहीं भूले हैं। विस्फोट का मंजर याद आते ही लोग सिहर जाते हैं।