धामपुर (बिजनौर)। नगर के एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। परिजनों ने उपचार में डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया। बाद में समझौता होने के बाद परिजन महिला के शव को साथ ले गए।
शेरकोट थाने के गांव परमावाला निवासी हरपला सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी शीला (22) को जब प्रसव पीड़ा हुई तो वह उसे प्रसव कराने को धामपुर के एक निजी अस्पताल में ले आया। डाक्टरों ने परीक्षण करने के बाद सामान्य डिलीवरी बताते हुए अस्पताल में भर्ती कर लिया। डाक्टरों ने सामान्य तौर पर जब बच्चा पैदा करने का प्रयास किया तो उसकी मौत हो गई। वह मृत बच्चे का क्रिया कर्म करने ले गए। करीब एक घंटे बाद शीला की भी मौत हो गई। जच्चा-बच्चा की मौत होने से परिवार में दुख का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों ने उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया। हरपाल सिंह का आरोप है कि शीला की मौत हो जाने के बाद अस्पताल के स्टाफ का उनके प्रति व्यवहार आक्रामक हो गया। स्टाफ ने आनन-फानन में एंबुलेंस को मंगा लिया और महिला के शव को जबरन ले जाने को दबाव बनाया। बाद में लोगों के हस्तक्षेप के बाद मामला किसी तरह विवाद निपटा। उधर, डाक्टर का कहना है कि महिला में हीमोग्लोबिन की कमी थी। उसमें केवल पांच प्रतिशत रक्त शेष था, जबकि प्रसव के दौरान 12 से लेकर 16 प्रतिशत हीमोग्लोबिन होना चाहिए। उनके प्रयास में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रही है।