मंडावर (बिजनौर)।
गांव कमालपुर के कालिका मंदिर के दिव्यांग पुजारी की गला रेंतकर निर्मम हत्या कर दी। खून से लथपथ शव मंदिर के प्रांगण में पड़ा मिला। इससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। एसपी सिटी और सीओ मौके पर पहुंच और मामले की जानकारी ली। डॉग स्क्वाड टीम ने भी हत्यारों के संबंध में सुबूत जुटाए। एक ग्रामीण ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
गांव कमालपुर की पूर्व दिशा में करीब 250 मीटर दूर लिंक रोड पर कालिका मंदिर है। मंदिर में पुजारी 70 वर्षीय अमीचंद उर्फ गणेश बाबा सरभंग महाराज रहते थे। वे दोनों पैरों से दिव्यांग थे और बैसाखी के सहारे चलते थे। शनिवार की सुबह ग्रामीणों ने मंदिर प्रांगण में उनका खून से लथपथ शव पड़ा देखा तो सनसनी फैल गई। सूचना पर एसपी सिटी रामधारी चौरसिया, सीओ सिटी गजेंद्र पाल सिंह और एसओ जसवीर सिंह मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। पुलिस के मुताबिक पुजारी के गले, सिर और माथे पर धारदार हथियार से काटे जाने के निशान थे। मंदिर के मुख्य गेट पर बाहर से ताला लगा हुआ था। डॉग स्क्वाड की टीम ने भी मौके पर पहुंचे जांच की। अमीचंद मंदिर में बने एक कमरे में रहते थे। हत्यारों ने पहले उन पर बरामदे किया और फिर घसीटकर परिसर में ले गए। घसीटे जाने के निशान मौके पर मिले हैं। पुलिस को मौके से एक टूटा हुए डंडे के अलावा मंदिर के पास बनी झोपड़ी से देशी शराब के दो खाली क्वार्टर, पानी की खाली बोतल, पांच गिलास मिले हैं। माना जा रहा है कि यहां शराब पीने वालों ने ही हत्याकांड को अंजाम दिया है। गांव के ही वीरेंद्र राजपूत ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पुजारी ने ही बनवाया था मंदिर
गांव वालों के मुताबिक अमीचंद खुद को कोटद्वार से आया बताते थे। वे पहले गांव के बाहर एक थले पर झोपड़ी बनाकर रहते थे। थले को मिले चंदे से उन्होंने ही यह मंदिर बनवाया था। अमीचंद शादीशुदा थे। उनकी पत्नी बिजनौर में रहती है कभी कभी मंदिर पर आती है। ग्रामीण ही पुजारी को खाना मंदिर में पहुंचाते थे।
सट्टे का नंबर पूछने वालों की रहती थी भीड़
गांव वालों के अनुसार पुजारी अमीचंद कभी- कभी शराब पीते थे। उनके पास शराब पीने के लिए इलाके के काफी युवा आते थे। सट्टे का नंबर पूछने वालों की भी भीड़ लगी रहती थी। आशंका जताई जा रही है कि नशा करने वालों ने ही किसी बात पर अमीचंद को मौत के घाट उतार दिया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कौन कौन लोग अमीचंद के पास ज्यादा आते थे।