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कोर्ट ने जमानत दी, पर नहीं मिले जमानती

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कोर्ट ने जमानत दी, पर नहीं मिले जमानती
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बिजनौर। जिला कारागार में पांच मुकदमों में बंद एक व्यक्ति को कोर्ट से तो एक साल पहले जमानत मिल गई, लेकिन उसे जमानती नहीं मिल रहे हैं। ये ही वजह है कि एक साल से बंदी को सलाखों के पीछे रहना पड़ रहा है। बंदी को जेल में जो भी मिलता है उससे ही वह जमानती दिलाने की गुहार लगा रहा है।
नहटौर थाने के गांव चक निवासी सद्दाम पिछने दो साल से जेल में बंद है। सद्दाम पर पांच मुकदमे दर्ज हैं। इनमें धामपुर में चोरी, दो रेलवे एक्ट, नजीबाबाद, मंडावली थाने में बिजली चोरी के मुकदमे शामिल हैं। दो साल से सद्दाम जेल में बंद हैं। सूत्रों के मुताबिक एक साल पहले सद्दाम की सभी मुकदमों में कोर्ट से जमानत हो गई है। जमानती नहीं मिलने के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ पा रहा है। जेल की सलाखों के पीछे जिंदगी गुजारने को विवश हैं। सद्दाम जेल से बाहर आने का रास्ता तलाश रहा हैं, लेकिन उसे कोई रास्ता नहीं मिल रहा है। सद्दाम जेल में अकेला ऐसा बंदी है, जिसकी कोर्ट से जमानत हो गई, लेकिन उसे जमानती नहीं मिल रहे हैं। उसके अलावा जेल में बंद किसी अन्य बंदी का इस तरह का मामला नहीं है।
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सद्दाम जेल की बैरक में बंद अन्य बंदियों से जमानती दिलाने की गुहार लगा चुका है, लेकिन उसकी कोई मदद नहीं कर रहा है। सद्दाम के अलावा अन्य बंदियों से मिलने आने वाले लोगों से भी सद्दाम मदद की गुहार लगा चुका है। जेल में अन्य किसी काम से आने वाले लोगों से भी सद्दाम अपनी समस्या बताते थक गया है, लेकिन कोई उसकी मदद नहीं कर रहा। जेल में निरीक्षण के लिए आने वाले अधिकारियों के सामने भी वह अपनी समस्या रख चुका है। सूत्रों के मुताबिक जेल में कोई दूसरा बंदी उससे जेल से निकलने के बारे में मालूम करता है तो ये कह देता है उसकी कोई जमानत नहीं भर रहा है।
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