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भ्रष्टाचार : मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की

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भ्रष्टाचार : मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की
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बिजनौर। ...मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की। गालिब के शेर के ये पंक्तियां जिले में गहरी हो चुकी भ्रष्टाचार की जड़ों पर सटीक बैठती हैं। भ्रष्टाचार की दीमक तमाम विभागों में लगी। मामले पकड़ में आए कार्रवाई हुई लेकिन पूरी तरह से रोक नहीं लग सकी। नौ दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक दिवस मनाया जाता है, लेेकिन इसका भ्रष्टाचारियों पर कोई असर नहीं होता।
राजस्व विभाग : नजीबाबाद के गांव मिर्जापुर की लेखपाल पूजा रानी की रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल हुई थी। जुलाई 2020 में लेखपाल को निलंबित करते हुए जांच बैठा दी गई। वहीं, इसी तहसील के गांव शादीपुर के हल्का लेखपाल ने सितंबर 2021 में वारिसान दर्ज करने की एवज में पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। जिस पर लेखपाल को निलंबित किया गया। जिले में हल्का लेखपाल के कई अन्य वीडियो वायरल हो चुके हैं। जिनमें लेखपाल रिश्वत लेते हुए नजर आए, निलंबन की कार्रवाई होने के बाद एक-एक कर मामले आते रहे।
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शिक्षा विभाग : इसी सात बिजनौर में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय बनाए जाने थे। जिनके निर्माण में यूपी सहकारी निर्माण विकास लिमिटेड ने निर्माण आधा अधूरा छोड़ करीब तीन करोड़ रुपये का घोटाला किया। नौ साल के बाद निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर को सितंबर 2021 में आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया था।
एनएचएम घोटाला : साल 2019-20 में स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ कार्यालय, समस्त सीएचसी और पीएचसी से फर्जी बिलों पर भुगतान कर घोटाला किया गया था। इससे एक साल पहले भी ऑडिटर ने घोटाला पकड़ लिया था। फर्जी जीएसटी वाले बिलों पर दो करोड़ 24 लाख का भुगतान किया गया था। इस विभाग में साल 2016 में भी तीन करोड़ दस लाख 95 हजार रुपये का घोटाला किया गया था।
सहकारिता विभाग : किसान सहकारी समिति फीना के मिनी बैंक में करीब डेढ़ करोड़ रुपये का गबन किया गया था। सितंबर 2020 में मामले में जांच बैठी। किसानों से पैसा लेने के बाद उन्हें रशीद नहीं दी गई थी। इसके अलावा सहकारी गन्ना समिति बिजनौर के गोदामों में भी गबन किया गया। हालांकि इस गबन की काफी रकम जमा कराई गई।
जमीन घोटाला : जिले में वन विभाग की जमीनों पर कब्जे के मामले सामने आते ही रहे हैं। नगीना एसडीएम के तत्कालीन स्टेनो ने साल 2020 में जमीन घोटाले का पर्दाफाश करते हुए शिकायती पत्र दिए थे। जिनमें तेलीपाड़ा समेत 12 गांव की जमीनों के राजस्व अभिलेखों में कूट रचित एंट्री कर नाम दर्ज कर दिए गए थे। 60 हजार बीघा जमीन घोटाले का आरोप लगाया गया था। यह मामला शासन स्तर तक पहुंचा, टीम गठित हुई। अब यह हाईकोर्ट में है।
पंचायती राज : पिछले दिनों ही ग्राम पंचायतों में बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण पर सवाल खड़े हुए। वहीं कई मामले पंचायत भवन के निर्माण में भी गुणवत्ता परक निर्माण सामग्री नहीं लगाए जाने के उजागर हुए। जिन पर जांच बैठा दी गई है।
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---------- कोट
विकास कार्यों में भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां से भी इस तरह की शिकायत आती है, उसकी जांच करा तत्काल कार्रवाई की जाती है - उमेश मिश्रा, डीएम
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