फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नजरबंद के सूत्र पर भारी पड़ेगा कोरोना का गणित

विज्ञापन
विज्ञापन
नजरबंद के ‘सूत्र’ पर भारी पड़ेगा कोरोना का ‘गणित’
विज्ञापन

बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भले ही पार्टियों के समर्थन पर सदस्य पद के प्रत्याशी जीतकर आए हों, लेकिन अध्यक्ष पद स्थानीय पकड़ और धन बल दोनों पर निर्भर करता है। इसके अलावा जिपं सदस्यों को नजरबंद करने का सूत्र भी बड़ी भूमिका निभाता है। हालांकि इस चुनाव में नजरबंद के तिलिस्म पर कोरोना का ग्रहण लग गया है। ऐसे में जिपं अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल दावेदार जीत पक्की करने के लिए नजरबंदी के अलावा धन बल और बेहतर रणनीति के विकल्पों को तलाश रहे हैं।
जिले में 56 जिला पंचायत सदस्य सीट हैं। इनमें सबसे बड़े दल की बात करें तो सपा, रालोद, भाकियू 26 सीटों के साथ मजबूत स्थिति में हैं। वहीं भाजपा 8 सीटों के साथ जोड़तोड़ की रणनीति पर जिपं अध्यक्ष पद पर अपनी पार्टी के प्रत्याशी को देख रही है। इन सभी के बीच एक बात खास है कि चुनाव तक जिपं सदस्यों को अपने पक्ष में बनाए रखना। पिछले चुनावों की बात करें तो बिजनौर जिपं अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान लगभग हर प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष के वोट को नजरबंद कर देते थे। इसके लिए सबसे ज्यादा उत्तराखंड में देहरादून, नैनीताल को शरणस्थली बनाया जाता था। वहां बड़े-बड़े होटल और रिसॉट में इन्हें कई-कई दिनों ठहराया जाता और दावतों का जोर चलता था।
विज्ञापन

परिजन करा देते थे अपहरण के मुकदमे
पुराने मामलों को देखें तो अधिकांश जिपं सदस्यों को चुपचाप उठवा लिया जाता था। उसका संपर्क उसके परिवार से भी काट दिया जाता था। ऐसे में कई मामलों में परिजन अपहरण तक का मुकदमा दर्ज करा देते थे, लेकिन चुनाव के दिन पता चलता था कि वह तो किसी बड़े होटल या रिसॉट में नजरबंदी का समय गुजार रहे थे।
मंत्री समेत 28 पर दर्ज हुआ मुकदमा
बात जिपं अध्यक्ष पद के चुनाव की चली है तो याद दिला दें 2013 के चुनाव में भी इसी तरह कई सदस्यों को नजरबंद किया गया था। कुछ सहमति से गए थे तो कुछ असहमति से। जिला पंचायत अध्यक्ष बिजनौर के उपचुनाव के समय यूपी के पूर्व मंत्री मूलचंद चौहान व पूर्व मंत्री एवं वर्तमान में नगीना से सपा विधायक मनोज पारस सहित दस लोगों पर 28 लोगों के अपहरण का आरोप था। चुनाव से चार दिन पूर्व जिला बिजनौर के नियामतपुर निवासी रोहित कुमार ने अपने पिता और तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य पवन कुमार सहित 28 लोगों के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था।
विज्ञापन

इस बार नजर आएगी अलग ही तस्वीर
इस बार सदस्यों को किसी होटल या रिसॉट में लेकर जाना आसान नहीं होगा। क्योंकि उत्तराखंड में प्रवेश से पहले कोरोना की जांच रिपोर्ट दिखानी होगी। वहीं, होटल में भी बिना जांच के एंट्री नहीं मिलेगी। ऐसे में जिपं सदस्यों को कहीं लेकर जाना आसान नहीं होगा। सूत्रों की मानें तो इस बार घर पर ही मान मनव्वल या दूसरी अन्य युक्ति लगाकर अपने पक्ष के सदस्य पक्के करने की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें