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फार्मासिस्ट में बना भ्रम मरीज को दवाई दें या नहीं

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बिजनौर। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजेश कुमार रवि ने बताया कि मानवाधिकार आयोग और महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं के निर्देश हैं कि चिकित्सक की अनुपस्थिति में किसी भी अनाधिकृत कार्मिक द्वारा मरीजों को दवा देने अनुमति न दी जाए। इसके बावजूद जनपद में ऐसा हो रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में संचालित पीएचसी और सीएचसी पर चिकित्सक तैनात नहीं हैं। इनमें फार्मासिस्ट द्वारा ही मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया जाता है, जिन अस्पतालों में चिकित्सक हैं भी तो उन्हें पोस्टमार्टम ड्यूटी, टीकाकरण अथवा अन्य विभागीय कार्यों में जाने के कारण भी फार्मासिस्ट को ही इन अस्पतालों की कमान संभालनी पड़ती है। इसके अलावा कई हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में स्टाफ नर्स को ट्रेनिंग देकर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) बनाया गया है। प्रत्येक सेंटर के लिए 58 दवाइयों की सूची भेजी गई है, जो सेंटर पर उपलब्ध रहेंगी। ऐसे में जहां पर चिकित्सक नहीं हैं तो वहां दवाओं को कौन लिखेगा। इस संबंध में फार्मासिस्ट मे भ्रम की स्थिति है
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उन्होंने बताया कि फार्मेसी एक्ट के अनुसार दवाओं का भंडारण, रखरखाव, वितरण का कार्य फार्मासिस्ट द्वारा किया जाता है। जहां फार्मासिस्ट भी तैनात नहीं हैं वहां यह काम कौन कर रहा है। इस संबंध में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई है और सीएमओ को ज्ञापन देकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। ज्ञापन देने वालों में ईश्वरी प्रसाद, अशोक भंडारी, जेडी सकलानी, राम सिंह, आनंद प्रकाश, एस.के. अमोली, दिग्विजय शाह, दीपक कुमार, अभय कुमार, रवि प्रताप सिंह, भारत भूषण, कविता वर्मा, सुधीर कुमार, निपेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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इस संबंध में सीएमओ डा. विजय कुमार यादव ने बताया कि शासन से मिले निर्देशों का पालन किया जाएगा।
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