बिजनौर। साल 1982 में रायपुर बेरीसाल के किसानों की 12 बीघा जमीन अधिग्रहण करते हुए सड़क बना दी गई थी। मगर उक्त जमीन का मुआवजा 35 किसानों को 43 साल के बाद मिल पाया। मुआवजा मिलने के साथ ही किसानों ने शुक्रवार को राज्यपाल के नाम अपनी अपनी जमीनों के बैनामे कर दिए। अधिग्रहित जमीन पर अब सड़क की मरम्मत भी हो सकेगी।
चंदक से रायपुर बेरीसाल होते हुए बालवाली जाने वाले मार्ग को 1982 में बनाया गया था। रायपुर बेरीसाल की आबादी के पास 500 मीटर की दूरी में सड़क का निर्माण किसानों की जमीन पर किया गया था। उस वक्त जमीन अधिग्रहित कर ली गई थी लेकिन मुआवजा नहीं दिया गया था। बिजेंद्र सिंह और कृपाल सिंह ने कोर्ट की शरण ली। लंबी जंग के बाद हाईकोर्ट ने इसी साल सात अप्रैल को मुआवजा 112 दिन में देने के आदेश दिए थे।
अदालत में केस के साथ साथ किसान धरातल पर भी लड़ रहे थे। इसी के चलते साल 2017 से किसानों ने इस सड़क की मरम्मत नहीं होने दी। आलम ये था कि करीब पांच सौ मीटर की दूरी में गहरे गहरे गड़ढे हो गए थे। अब शुक्रवार को किसानों ने अपने अपने नाम पर दर्ज चल रही आ रही जमीन के बैनामे उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के नाम कर दिए। इसी के साथ उनकी मुआवजा राशि भी खातों में भेज दी गई। शुक्रवार को ही कुछ किसान भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह के आवास पर पहुंचे और मिठाई खिलाई। मुकदमे के वादी रहे बिजेंद्र सिंह और कृपाल सिंह ने बताया कि गांव रायपुर बेरीसाल के किसानों को मुआवजा दिलाने का पूरा प्रयास किया जा रहा था।