बिजनौर के अफजलगढ़ में बैंकों से कैश नहीं मिलने के विरोध में बृहस्पतिवार को ग्राहकों ने जमकर हंगामा किया। ग्राहकों ने कहा कि कड़ाके की ठंड में सारा काम छोड़कर कैश के लिए सुबह आठ बजे से बैंक के बाहर लाइन में लगने को मजबूूर हो जाना पड़ता है। अधिकतर बैंकों में करीब तीन से चार घंटे बाद ही नो कैश का बोर्ड टांग दिया जाता है। उधर, धामपुर के बसेड़ा खुर्द के सर्व यूपी ग्रामीण में पिछले काफी समय से कैश नहीं मिलने पर लोगों ने जमकर हंगामा किया।
नोटबंदी के बाद से कड़कड़ाती सर्दी के चलते भी लोगों का बैंकों की लाइन में लगना मजबूरी बन गया है। नगर के पंजाब नेशनल, स्टेट बैंक, सर्वयूपी ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंकों के बाहर हजारों लोग लाइनों में लग गए। मगर, बैंकों में कैश की कमी के चलते उपभोक्ताओं को पर्याप्त पैसा नहीं मिल पा रहा है। उन्हें दो हजार रुपये लेकर ही संतोष करना पड़ रहा है। उपभोक्ता महावीर, अजय सिंह, भूपेंद्र, शैलेंद्र, हिमांशु, हरपाल, सरफराज, वकील, जहीर, जुनैद, सकीला, नूरजहां, शमीमा बेगम, पार्वती आदि का कहना है कि नोटबंदी के 36 दिन बीत गए। मगर, उनके सामने पुराना नोट जमा करने के बाद पैसों की समस्या मुंह बाएं खड़ी है। अब लोगों के पाससब्जी, दूध रोजमर्रा के समान के लिए भी पैसा नहीं है। बीमारी भी पीछा नहीं छोड़ती है। इलाज कैसे कराएं। बच्चों की फीस भी नहीं जा रही है। दोपहर तक जैसे तैसे लाइन में लगे रहते हैं। उसके बाद नो कैश का बोर्ड लग जाने पर उन्हें बिना पैसा लिए ही वापस होना पड़ता है। यदि कुछ दिन यही हाल रहा तो उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी। ग्रामीणों ने डीएम से बैंकों की व्यवस्था में सुधार कराने व पर्याप्त कैश की व्यवस्था मांग की है। गांव बसेड़ा खुर्द के सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में लोगों ने बृहस्पतिवार को जमकर हंगामा किया। पर्याप्त कैश लाने का काम बैँक अधिकारियों का है। हर रोज नो कैश की समस्या सुनते लोगों का बुरा हाल है। वह अब ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं करेंगे। खाताधारक वीरेंद्र कुमार, मदन सिंह, कुलवीर सिंह, कृष्णपाल सिंह, अबरार, सईद, दिनेश, पप्पू का कहना है कि यदि जल्द कैश का सुधार नहीं हुआ तो बैंक में तालाबंदी होगी, जिसकी जिम्मेदारी बैंक अधिकारियों की होगी। उधर, शाखा प्रबंधक एमए खान का कहना है कि उनके द्वारा जितना कैश प्राप्त हो रहा है, वह उसी हिसाब से लोगों में बांट रहे हैं। उनके लिए सभी खाताधारक समान है।