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एटीएम में कैश ढूंढते रहे ग्राहक, कैसलेस िमले

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मंडावर में पीएनबी के एटीएम के बाहर प्रदर्शन करते युवक। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिजनौर में नोटबंदी को एक माह से अधिक हो चुके हैं। जिले में इतने दिनों में करीब 350 करोड़ का कैश बंट चुका है। अब 200 करोड़ रुपये की नई करेंसी पहुंची है। बैंकों में कैश होने की भनक लगते ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ पड़ी। यह हाल भी तब है जब जिले के काफी उपभोक्ता डिजिटल पेमेंट की ओर बढ़ रहे हैं।
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जिले में 30 बैंकों की करीब 315 शाखाएं हैं। पहले जिले में बैंकों से करीब 25 करोड़ का लेन-देन होता था। लेकिन नोटबंदी के बाद से ग्राहकों ने 500 और एक हजार के पुराने नोट बैंकों में जमा कर दिए। कई दिन तक बैंकों ने अपने पास रखा कैश ही ग्राहकों में बांट दिया। लेकिन अब नई करेंसी आने पर ही कैश का वितरण हो पा रहा है। 
एक अनुमान के मुताबिक जिले में अब तक करीब 350 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। इतनी करेंसी मिलने के बाद भी बैंक खाली हैं और बैंकों के बाहर नो कैश का बोर्ड टंगा है। एक सप्ताह में उपभोक्ताओं को 24 हजार रुपये दिए जाने का नियम होने के बाद भी कहीं पर उपभोक्ताओं को दो तो कहीं पर चार हजार रुपये दिए जा रहे हैं। 
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जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार के मुताबिक बैंकों में करीब 200 करोड़ की नई करेंसी मिल चुकी है। बाकी करेंसी के लिए भी आरबीआई के अधिकारियों से वार्ता हो रही है। उधर, कैश की किल्लत के बीच शादी वाले परिवारों में कुछ लोग चेक देकर सामान की खरीदारी कर रहे हैं तो कुछ रिश्तेदारों और परिचितों से पैसा लेकर काम चला रहे हैं। चांदपुर क्षेत्र के किसान महराम सिंह बताते हैं कि  उनकी बेटी की शादी अगले हफ्ते होनी है। वे शादी के लिए ढाई लाख रुपये लेने के लिए पीएनबी के शाखा प्रबंधक के नाम एसडीएम से चिट्ठी लिखवाकर पहुंचे तो बैंक प्रबंधक ने कैश की कमी कहते हुए वापस भेज दिया।  महराम सिंह के मुताबिक उन्होंने रिश्तेदारों से मदद के लिए कहा तो कई रिश्तेदारों ने उनके घर पर कैश भिजवा दिया। उधर, सामान की खरीदारी चेक काटकर की। उसने बताया कि डीजे भी चेक देकर ही बुक किया। 
बारात के खाने के लिए हलवाई को ही पर प्लेट के भुगतान के आधार पर खाना बनाने का ऑर्डर दे दिया। उनके अनुसार कैश में भुगतान करने पर दुकानदार से थोड़ा बहुत मोलभाव कर लेते हैं। लेकिन चेक देने पर व्यापारी से मोलभाव करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। उनके मुताबिक कैश की परेशानी तो है। लेकिन परिचित मदद करने के लिए आगे भी आ रहे हैं।
एटीएम के बाहर रहा सन्नाटा
बैंकों में तीन दिन की छुट्टी के पहले दिन बैंकों और एटीएम मशीनों के बाहर सन्नाटा सा पसरा रहा। उपभोक्ता कैश लेने आए भी तो एटीएम मशीनों पर ताले लटके देखकर लौट गए। जिला मुख्यालय पर पहले दिन किसी भी एटीएम मशीन ने कैश नहीं दिया। जिला मुख्यालय पर बैंकों की करीब 30 एटीएम मशीन लगी हैं। 
आमतौर पर हर रोज दो तीन एटीएम मशीनों में कैश रखा जाता है, लेकिन शनिवार को सभी एटीएम मशीन कैश से खाली रही। जिला सहकारी बैंक, यूनियन बैंक सहित कई बैंकों की एटीएम मशीनों में अब तक कोई रुपया नहीं रखा गया है। रोज जिन एटीएम मशीनों के बाहर जाम लगा रहता था, वहां शनिवार को सन्नाटा पसरा रहा। जिन बैंकों की मशीनों में कैश रखा भी जा रहा है, वहां दो हजार का नोट अब तक नहीं रखा गया है। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार के अनुसार बैंक अपनी कैश की उपलब्धता के आधार पर ही एटीएम मशीनों में कैश रखते हैं।  
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