बिजनौर। जनपद स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की बैठक हुई। इसमें जिलाधिकारी ने खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और निगरानी की समीक्षा करते हुए अफसरों को उर्वरक वितरण की निगरानी के निर्देश दिए।
डीएम जसजीत कौर की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में बैठक हुई। इसमें जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि वर्तमान में यूरिया 27,192 मीट्रिक टन, डीएपी 8,247 मीट्रिक टन, एनपीके 2,119 मीट्रिक टन, एमओपी 189 मीट्रिक टन, एसएसपी 1,275 मीट्रिक टन तथा एमएपी 748 मीट्रिक टन उपलब्ध है। बताया कि मार्च 2026 से सितंबर 2026 तक के खरीफ सीजन के लिए जनपद में यूरिया 95,605 मीट्रिक टन, डीएपी 15,512 मीट्रिक टन, एनपीके 2,691 मीट्रिक टन, एमओपी 2,297 मीट्रिक टन तथा एसएसपी 5,482 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अधिकारियों ने दावा किया कि सहकारी समितियों, गन्ना समितियों और निजी विक्रेताओं के यहां यूरिया व फास्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता सामान्य बनी हुई है। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में गन्ने की फसल में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। उप कृषि निदेशक ने उर्वरक विक्रेताओं को प्रतिदिन रेट बोर्ड और स्टॉक बोर्ड अपडेट करने, किसानों को कैश मेमो देने तथा डीएपी के विकल्प के रूप में एसएसपी और एनपीके के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में डीएम ने सहकारिता और गन्ना विभाग को उर्वरक वितरण की सतत निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की व्यवस्था के अनुसार प्रति हेक्टेयर एक सीजन में सात बैग यूरिया और पांच बैग डीएपी का वितरण सुनिश्चित किया जाए। सीमावर्ती समितियों पर विशेष निगरानी रखने और उर्वरक की कालाबाजारी, टैगिंग तथा अधिक मूल्य वसूली पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।