विरोध के चलते जिले में ऑपरेशन गुलदार अभियान स्थगित रहा। शादीपुर में फाल्ट ठीक करने गए दो लाइनमैन गुलदार को देखकर खंभे पर चढ़ गए। ग्रामीणों ने हांका कर गुलदार को खदेड़ा और दोनों को काफी देर बाद नीचे उतारा। देर शाम सिकंदरपुर गांव में नरभक्षी गुलदार की लोकेशन मिली तो टीम ने मचान बना दिया। उस पर ट्रैंकुलाइज विशेषज्ञ चिकित्सक को तैनात कर दिया। इसके अलावा जिले में कई जगहों पर गुलदार दिखने, बकरी, मवेशियों को मारने की सूचनाएं आईं।
गुलदार की दहशत में स्कूल नहीं आ रहे बच्चे
नगीना क्षेत्र में गुलदार के बढ़ते आतंक के चलते गांव में स्थित सरकारी विद्यालयों में भी बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। खुद विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जब से गुलदार के हमलों की संख्या में इजाफा हुआ है, करीब 20 से 30 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति विद्यालयों में कम हो गई हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गुलदार प्रभावित क्षेत्रों के विद्यालयों को भी चिह्नित कर शिक्षक-शिक्षिकाओं को वहां सावधानी बरतने के निर्देश दे दिए हैं। ब्लॉक कोतवाली के खंड शिक्षा अधिकारी इंद्रजीत सिंह ने बताया कि गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में आ रहे सरकारी विद्यालयों का सर्वे कराया है। ब्लॉक में 18 ऐसे विद्यालय हैं जो गांव की आबादी से करीब 100-200 मीटर की दूरी पर घने जंगल के आसपास स्थित हैं। शिक्षक-शिक्षिकाओं को बच्चों की सुरक्षा के प्रति सचेत रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र के ग्राम हरवंश वाला, भोगपुर, भोगपुर खदरी, सरदारपुर, उग्रसेनपुर, तोफिक वाला, समसपुर सद्दो, हीरावाली, नारायणपुर रामजी, शेरनगर नरेनी, नूर अलीपुर भगवंत, वन विटोल, दोदराजपुर, सूफीपुर अंगत, अलीपुर मान, फतेहपुर, रावलहैड़ी में स्थित विद्यालयों को चिह्नित किया गया हैं। बच्चों की छुट्टी के समय माता-पिता को बुलाकर उनके साथ ही बच्चे को घर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
गुलदार का डर, मंडराया चारे का संकट
अफजलगढ़ क्षेत्र में गुलदार के हमलों के बाद ग्रामीणों में भय व्याप्त है। जंगल में लगातार गुलदारों के मंडराने के चलते किसान खेतों पर नहीं जा रहे हैं। जिससे पशुओं के चारे की दिक्कत हो रही है। फसलें भी देखरेख के अभाव में चौपट होने की कगार पर हैं। गुलदार क्षेत्र में छह लोगों को मार चुका है, रेहड़ क्षेत्र में ही अधिक मौत हुई हैं।
गांव शाहपुरजमाल, मच्छमार, बादशाहपुर, भटपुरा, मोहम्मदपुर राजौरी, महसनपुर, आसफाबाद चमन, उदयपुर, दहलावाला, खैरूल्लापुर, अलियारपुर, कासमपुर गढ़ी सहित आसपास के गांव को गुलदार ने अपना ठिकाना बना रखा है। जबकि वन विभाग की टीम के सक्रिय होने के बाद भी गुलदार पकड़ से बहार है। मुरलीवाला निवासी भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष मदन राणा का कहना है कि क्षेत्र नेशनल कार्बेट पार्क के समीप होने के कारण जिलेभर में गुलदार का आतंक छाया है। गुलदार के हमले में मारे गए परिवार को 50 लाख नकद व परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दी जानी चाहिए।
बनियोवाला निवासी गुरविंदर सिंह का कहना है कि गुलदार के हमलों में हुई लगातार मौतों के बाद जब गुलदार को नरभक्षी घोषित कर दिया गया है तो उसे मार दिया जाए, अन्यथा की स्थिति में किसान को गुलदार को मारने की अनुमति दी जाए ताकि वह अपनी व परिवार की रक्षा कर सकें। कल्लूवाला निवासी सरदार मलकीत सिंह का कहना है कि गुलदार के हमलों में क्षेत्र में कई घटनाएं हो चुकी हैं। इस पर वन विभाग अंकुश लगाए। जो गुलदार नरभक्षी घोषित हो चुके हैं उन्हें वन विभाग चिह्नित कर या तो ट्रैंकुलाइज कर वन क्षेत्र में छोड़ें या उन्हें शीघ्र मारा जाए। क्षेत्र को गुलदार के भय से मुक्त किया जाना चाहिए।
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