हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिन कई जगह जागरूकता अभियान व अन्य कार्यों होते हैं। अभियान में बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर उनके परिजनों को समझाया जाता है। ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा लेकर अपना भविष्य संवार लें। परंतु परिवार की गरीबी के चलते बालक चाय, मिष्ठान, किराना आदि दुकानों व भट्ठों आदि पर श्रम करने को मजबूर हैं। यह किसी अभिशाप से कम नहीं है।
भट्ठे से लेकर शोरूम तक कर रहे काम
बाल कल्याण समिति ने इस साल अभी तक करीब 19 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। इनमें एक बालक झारखंड का निकला, जिसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। श्रम विभाग की ओर से इस साल अभी तक करीब 40 बाल श्रमिकों को दुकान, शोरूम, भट्ठे, क्रेशर आदि से मुक्त कराया। गत वर्ष में करीब 102 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया था।
शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा
शिक्षा ही ऐसा अचूक हथियार है, जो धूल के फूलों को खिला सकती है। दुकानों व अन्य प्रतिष्ठानों पर बाल श्रम करने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया जाएगा। अफसरों का कहना है कि अभियान चलाकर पहले इन्हें मुक्त कराया जाएगा। फिर उन्हें नजदीक स्कूलों में प्रवेश दिलाने का कार्य किया जाएगा।
वैसे तो समय समय पर अभियान चलाकर बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जाता है, लेकिन जून माह में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। बच्चों से श्रम न कराने के लिए अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा - रूबी गुप्ता, बाल संरक्षण अधिकारी जिला प्रोबिजन कार्यालय