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कैच द रैन अभियान ने पकड़ा जोर

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अफजलगढ़ ब्लाक के गांव शेखपुरा लाला में तालाब की खोदाई करते श्रमिक। - फोटो : BIJNOR
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कैच द रैन अभियान ने पकड़ा जोर
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बिजनौर। भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इसलिए शासन का जल स्तर बढ़ाने के लिए जल संचयन पर जोर है। इसके लिए शासन ने ‘कैच दा रैन’ कार्यक्रम शुरू किया है। जिसके अंतर्गत गांवों में तालाब खोदे जा रहे हैं। लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
जिला उपायुक्त मनरेगा ज्ञान सिंह ने बताया कि जल संचयन के लिए शासन ने कैच दा रैन कार्यक्रम एक अप्रैल से शुरू किया है। अभियान 30 जून तक चलेगा। इस काम में मनरेगा मजदूरों को लगाया जा रहा है। 11 ब्लॉक की पंचायतों में करीब 29 हजार मजदूर लगे हैं। ढाई महीने में गांवों में 39 नए तालाब खोदे गए हैं। 30 पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार हो गया है। पंचायतों में पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदे जा रहे हैं। बरसाती तथा घरेलू पानी को जमीन के नीचे पहुंचाया जा रहा है। बताया कि सीडीओ केपी सिंह अभियान की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।
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स्कूलों के वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पड़े हैं ठप
शासन ने जिले के राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पानी की बरबादी रोकने का अभियान चलाया था। इसके लिए कमरों व सरकारी दफ्तरों के छतों के पानी को भूमिगत पहुंचाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए थे। जिले में 32 राजकीय व 73 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय हैं। सालों पहले लगे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम उचित देखभाल के अभाव में ठप हो गए गए हैं। आरोप है कि पानी ले जाने के पानी न तो मानक अनुरूप थे और न ही पाइप भूमि के नीचे तय गहराई तक पहुंचाएं गए थे।
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