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छोईया नदी के किनारे गांवों में फैला कैंसर, अपंग पैदा हो रहे बच्चे

Wed, 12 Sep 2018 11:56 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
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टैंक फटने की घटना के बारे में डीएम से जानकारी लेते नेता। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर के मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री का केमिकलयुक्त पानी छोईया नदी में बिना साफ किए डालकर नदी के आसपास के गांवों को कैंसर व अन्य बीमारी परोसी जा रही हैं। कैंसर के साथ इन गांवों में अब अपंग बच्चे पैदा होने लगे हैं। इसका सबूत देने के लिए कई गांव वाले तैयार हैं। अफसरों व नेताओं की शह पर फैक्ट्री स्वामी इस काम को कर रहा है। कभी भी इस पानी के छोईया नदी में डालने पर लगाम नहीं लगाई गई।
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मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री का केमिकलयुक्त पानी दिखाने के लिए तो फैक्ट्री के पास तालाब बनाकर चार पंपिंग सेट लगाए गए हैं। गांव वालों के मुताबिक दिन में कुछ देर के लिए पंपिंग सेट चलाकर उन्हें दिखा दिया जाता है और रात में तालाब का सारा केमिकल युक्त पानी वहां से निकल रही छोईया नदी में डाल दिया जाता है। इस पानी को बंद कराने के लिए कई बार आंदोलन हुए, पर यह पानी डाला जाना बंद नहीं हुआ। पानी की वजह से गांव हादरपुर, नवादा, गडाना, अगरी, अगरा, सुंदरपुर, लावलपुर, मंगोलपुरा, नसीरी, झलरी, मोमनपुर पेद्दी, चौकपुरी, छोईया नंगली, लालवाला, लक्खूवाला, सलेमपुर, फैजाबाद, चकगढ़ी, सिकंदरी समेत कई गांवों में कैंसर जैसे रोग फैल रहे हैं। इन गांवों में हैंडपंप का पानी भी पीने योग्य नहीं रह गया है। गांव वालों ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि इस पानी को बंद कराने के लिए आवाज तो उठाते हैं पर बाद में फैक्ट्री स्वामी से पैसा लेकर अपना मुंह बंद कर लेते हैं। अफसरों व नेताओं की शह पर छोईया नदी में केमिकल युक्त पानी डालने का काम चल रहा है।


छोईया नदी के किनारे कोई गांव ऐसा नहीं बचा जहां पर कैंसर के रोगी न हों। अब तो एक एक गांव में कैंसर के दस दस रोगी भी मिल रहे हैं। पर यह पानी छोईया नदी में डाला जाना बंद नहीं हो रहा है। गांव वालों ने यह भी आरोप लगाया कि अब तो कैंसर के साथ बच्चे भी अपंग पैदा होने लगे हैं। पर किसी को इसकी परवाह नहीं है। अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं। डीएम से भी गांव वालों ने यह शिकायत की। डीएम ने इन गांवों के पानी की जांच कराने के अफसरों को निर्देश दिए हैं। कहा कि छोईया नदी में यह पानी डालना बंद कराया जाएगा।
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एडीएम ने देखा पंपिंग सेट
गांव वालों की शिकायत पर डीएम ने एडीएम प्रशासन विनोद कुमार गौड़ को फैक्ट्री की ओर से तालाब में लगे पंपिंग सेट को देखने के लिए भेजा। एडीएम के साथ रालोद के जिलाध्यक्ष अशोक चौधरी भी तालाब पर गए। उन्होंने गांव वालों के साथ मिल मालिकों की एडीएम को करतूत दिखाई। कहा कि दिन में पंपिंग सेट चलाकर रात में पानी छोईया नदी में डाला जाता है। बताया कि घटना के बाद छोईया नदी को साफ करने के लिए मिल मालिकों ने जेसीबी मशीन लगा रखी है। बाद में एडीएम ने यह बात आकर डीएम को बताई।


एक साल में होती थी फैक्ट्री की जांच
बिजनौर। मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री सभी नियमों को ताक पर रखकर चल रही थी। नियमानुसार एक माह में फैक्ट्री की जांच होनी चाहिए। पर एक साल के अंदर कानपुर से बॉयलर जांच करने आता था। किसी को कोई लेना देना नहीं था कि फैक्ट्री में क्या हो रहा है। जिले में मोहित पेट्रो केमिकल समेत एल्कोहल बनाने वाली सात फैक्ट्री हैं। डीएम अटल कुमार राय के मुताबिक एक माह के भीतर फैक्ट्री की जांच होने का नियम है। देखा जाना चाहिए कि फैक्ट्री की सारी मशीन व टैंक वगैरह सब सही है या नहीं। डीएम को फैक्ट्री से जुड़े अफसरों ने बताया कि फैक्ट्री की जांच एक माह में नहीं बल्कि एक साल में एक बार होती थी। कारखाना विभाग से जुड़ा बॉयलर इंस्पेक्टर कानपुर से जांच करने के लिए आता था। इसके अलावा कोई और जांच नहीं होती थी। इस बात पर डीएम ने नाराजगी जताई और कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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