छोइया नदी किनारे बसे गांव में कैंसर का प्रकोप
बिजनौर। यूं तो जिले की हवा और पानी स्वच्छ है, लेकिन छोइया नदी किनारे बसे गांव में भूजल भी प्रदूषित हो चुका है। जिसका नतीजा ये हुआ कि दर्जनभर गांव में लोगों को कैंसर जकड़ रहा है। पिछले दस सालों में पचास से अधिक लोगों की मौत कैंसर से हो चुकी हैं। तमाम शिकायतों के बाद भी इन ग्रामीणों को कोई राहत नहीं मिल सकी। छोइया नदी के पास लगे नलकूप भी साफ पानी नहीं उगलते हैं।
जिले में छोईया एक बरसाती नदी है। पहले सिर्फ बरसात में ही इसमें पानी बहता था। अब पूरे साल फैक्टरी से निकलने वाला पानी बहते हुए दिखाई दे जाएगा। फैक्टरी का केमिकल युक्त पानी छोड़े जाने से अब छोइया में काली पानी बहते हुए दिखाई देता है। नदी के किनारे लगे नलकूप मटमैला पानी फेंकते हैं। इसके अलावा गांव में भूजल भी खराब हुआ। गांव के हैंडपंपों के पानी का स्वाद बिगड़ा और बीमारी होने लगी तो लोगों को हकीकत समझने में देर नहीं लगी। कई बार लोगों ने शिकायतें की, धरना प्रदर्शन हुए फिर भी कोई नतीजा नहीं निकल सका।
इन गांव में फैलता है कैंसर
नवादा, हादरपुर, छोइया नंगली, छोइया जलालपुर, छाछरी, शाहपुर लाल, सिंकदरी, अगरी, अगरा, मोमिनपुर दर्गो, गड़ाना, सुंदरपुर पूरी तरह से प्रभावित हैं। इन गांव में कैंसर का प्रकोप है। हर साल एक या दो लोगों को कैंसर अपनी चपेट में ले लेता है।