बिजनौर जिले में सीएए के विरोध की आड़ में हुए बवाल के बाद 43 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। जिनसे करीब 45 लाख की संपत्ति के नुकसान की भरपाई की जानी थी। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने नोटिस वापस लेे लिए हैं। जिससे बवाल के केस में आरोपी रहे लोगों को राहत मिली है।
2019 में दिसंबर की 20 तारीख को को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जिलेभर में बवाल हुआ। बिजनौर में उपद्रवियों ने पथराव कर दुकानों में तोड़फोड़ की थी। तमाम लोगों पर हमले किए गए थे। इसके अलावा नहटौर, नजीबाबाद, नगीना समेत कई शहरों में बवाल हुआ था।
नहटौर में गोली लगने से सुलेमान और अनस की मौत हो गई थी। नहटौर में पुलिस की तीन गाड़ियों में आग लगा दी गई थी। जिलेभर में पांच हजार से ज्यादा लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। 146 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। बवाल के 13 केस दर्ज हुए। जिनमें आरोप पत्र भी दाखिल किए गए थे।
पुलिस की रिपोर्ट पर प्रशासन ने 43 लोगों को वसूली के नोटिस जारी किए थे। इन नोटिस के खिलाफ लोग कोर्ट गए। हालांकि इसके बाद नोटिस की संख्या और बढ़ी। प्रशासन इनकी लिस्ट जुटा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब सरकार ने नोटिस वापस ले लिए हैं। ऐसे में जिन्हें नोटिस मिले थे, उन्होंने राहत की सांस ली।
एडीएम प्रशासन विनय कुमार ने बताया कि जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे, उसके मुताबिक आगे कार्य होगा। यह मामला एडीएम वित्त एवं राजस्व की कोर्ट में चला था। कितने नोटिस जारी हुए उसके बारे में पता किया जा रहा है।
इन्हें जारी हुए थे नोटिस
बिजनौर के बवाल में पूर्व चेयरमैन जावेद आफताब, परवेज आफताब, आदिल उर्फ चुहिया, इरशाद अथर, मास्टर शहादत हुसैन, मिर्जा जिशान बेग, अधिवक्ता वाजिद, सभासद अकील, शकील और नहटौर के मास्टर अकील, डाक्टर खुर्शीद, रफीक, शहबाज, भूरा, सलीम, मोहम्मद आकिब, शकील, सादिक को भी नोटिस जारी किया गया था। महराज, अनस, शिब्बू उर्फ समीर, मोहम्मद अख्तर, अफजाल उस्मानी, मुन्ने हसन, शाहनवाज, आदिल, परवेज पासी, राजू चौधरी, शाहरुख, कफील, अनस, नासिर कुरैशी, कमर अहमद, मोहम्मद यूनुस, जावेद, शमशुद्दीन को नोटिस मिला था। नबील, गुड्डा, वसीम, शुएब, जैद, फारूख, यूसुफ खान, जाफर आदि को नोटिस दिया गया था।