बिजनौर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत मित्तल ने फर्नीचर कारोबारी मुजम्मिल की हत्या में शहजाद और कासिफ को दोषी पाया है और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 70 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। आजीवन कारावास की सजा पाने वाले दोनों दोषी जीजा-साले हैं।
थाना नजीबाबाद में 27 मई 2017 को फैय्याज अहमद निवासी जलालाबाद ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि उसके भाई मुजम्मिल से शहजाद निवासी जलालाबाद ने 21 हजार रुपये उधार लिए थे। पैसे वापस मांगने पर शहजाद उसके भाई मुजम्मिल से रंजिश रखने लगा। 27 मई 2017 की रात 11 बजे मुजम्मिल अपने बड़े भाई एजाज़ अहमद के साथ मस्जिद से नमाज पढ़ कर लौट रहे थे, तभी शहजाद और कासिफ निवासी साहनपुर ने उन पर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया। शहजाद ने मुजम्मिल के पेट में चाकू घोंप दिया, कासिफ ने एजाज के पेट में छुरा घोंपा। शहजाद की मां फरीदा और शहजाद की बहन तबस्सुम ने मुजम्मिल के हाथ-पैर पकड़ रखे थे।
हमले में गंभीर रूप से घायल मुजम्मिल और एजाज को अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में ही मुजम्मिल की मौत हो गई तथा एजाज को मेरठ के लिए रेफर किया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना की। विवेचना में फरीदा और तबस्सुम की नामजदगी झूठी पाई गई। इसके बाद पुलिस ने शहजाद और कासिफ के खिलाफ हत्या और जानलेवा हमले की धारा में आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। अदालत ने सुनवाई के बाद शहजाद और कासिफ को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पुलिस के आरोप पत्र में जिक्र किया गया कि मुजम्मिल मुंबई में रहकर फर्नीचर का कारोबार किया करते थे, उनके यहां पर शहजाद नौकरी करता था। उसने अपनी बहन की शादी के लिए पैसे उधार लिए थे। उधार की रकम वापस मांगने पर शहजाद ने अपने बहनोई कासिफ के साथ मिलकर मुजम्मिल की हत्या कर दी दी थी।