फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

.......अभी तक जो नहीं उभरा वो मंजर देखना चाहा

विज्ञापन
विज्ञापन
शेरकोट। शेरकोट में डॉ. नईम सागर बिजनौरी मरहूम की किताब उजालों की मंजिल का विमोचन किया गया। इस दौरान मुशायरे का भी आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने कलाम पेश कर लोगों की वाहवाही लूटी।
विज्ञापन

मोहल्ला कायस्थान में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। डॉ. नईम के सुपुत्र और नेवी में लेफ्टिनेंट कमांडर खुर्शीद अनवर बेग ने अपने विवाह के अवसर पर पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा सरदार अफ़जल बेग ओर मसूद अख्तर बेग भी आयोजन में रहे। मुशायरे में नगीना से आए अतहर शकील ने अपना कलाम पेश किया, उन्होंने कहा, महक सांसों में चेहरे को गुल ए तर देखना चाहा, अभी तक जो नहीं उभरा वो मंजर देखना चाहा। खालिद शेरकोटी ने डा. साग़र बिजनौरी की याद में कहा, दिल था शफ़ाफ़ आईने जैसा उसका किरदार मुखलिसाना था। जाने माने शायर तय्यब आजाद शेरकोटी ने कहा, नजर आता नहीं इमकान ताशदीद ए ताल्लुक का, जहां वो हैं वहां पर हद हमारी खत्म होती है। अन्य शायरों में नगीना से इमरान सागर, धामपुर से कारी राशिद हमीदी, शेरकोट से शफकत भारती, फुरकान अंसारी, हशमत राही, अफजल शेरकोटी, तारिक शेरकोटी, खालिद शेरकोटी, बशारत उल्ला बशर, अब्दुर्रहमान शाद आदि ने अपना कलाम पेश किया। प्रोग्राम की अध्यक्षता दिल्ली से आए डा. सईदउद्दीन कासमी ने की और संचालन तय्यब आजाद शेरकोटी ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें