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कुशल रणनीति की वजह से मिली भाजपा को जीत

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कुशल रणनीति की वजह से मिली भाजपा को जीत
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शैलेंद्र गौड़
बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सभी दल मिलकर भी भाजपा का तिलिस्म नहीं तोड़ सके। विपक्षी दलों के हर दांव की भाजपा नेता काट करते चलते रहे। गठबंधन के नेताओं को उम्मीद थी कि भाजपा के पाले में जो सदस्य गए हैं वे क्रॉस वोटिंग करेंगे लेकिन ऐसा नहीं होने दिया गया। उलटे गठबंधन के पाले के सदस्य क्रॉस वोटिंग करके भाजपा की झोली में चले गए। चुनाव में कहीं लगा भी नहीं कि भाजपा सत्ता दल होने का फायदा उठा रही है। इसके बाद भी कुशल रणनीति की वजह से भाजपा की जीत हुई।
जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में भाजपा ने 55 सीट पर प्रत्याशी खड़े किए थे पर आठ में ही जीत मिल पाई। भाजपा के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज होना टेढ़ी खीर लगा रहा था। आठ सदस्यों वाली पार्टी बहुमत तक कैसे पहुंचेेगी इसे लेकर पार्टी के नेता भी आशंकित थे। भाजपा के खिलाफ रालोद सपा गठबंधन को भाकियू, आजाद समाज पार्टी, पूर्व विधायक शाहनवाज राना की पत्नी इंतखाब राना व कई निर्दलीय सदस्यों का भी साथ मिल गया था। एक समय ऐसा लग रहा था कि गठबंधन के पास 35 से अधिक सदस्य हो गए हैं। भाजपा हाईकमान ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की कमान परिवहन मंत्री अशोक कटारिया को सौंप दी।
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अशोक कटारिया टीम के साथ बिजनौर में डेरा डाले रहे। वे कई बार हरिद्वार जाकर भाजपा प्रत्याशी साकेंद्र प्रताप सिंह के खेमे के सदस्यों से भी मिले और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे अपने क्षेत्र की एक-एक महत्वपूर्ण सड़क का प्रस्ताव बनाकर उन्हें दे दें। वे मुख्यमंत्री से उनकी सड़क को मंजूरी दिलाएंगे। वोटरों को खरीदने का खेल भी खूब चला। आलम ये था कि कई सदस्यों ने दोनों ओर से पैसा ले लिया। भाजपा के खेमे के कई सदस्यों को गठबंधन प्रत्याशी का भी पैसा पहुंच गया। सपा और रालोद नेताओं को उम्मीद थी कि भाजपा के पाले के सदस्य उन्हें क्रॉस वोटिंग करेंगे जबकि भाजपा खेमे ने गठबंधन प्रत्याशी के पाले के सदस्यों में सेंधमारी कर रखी थी। मतदान के दौरान ये संभावना भी जताई जा रही थी कि दोनों प्रत्याशियों को कहीं बराबर वोट न मिल जाएं।
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चरणजीत कौर के साथ उनके सहित 28 वोट कलक्ट्रेट आए और साकेंद्र प्रताप के साथ 27। ऐसे में पलड़ा चरणजीत कौर का भारी था लेकिन जब वोट पड़े तो गठबंधन के तीन वोटरों ने साकेंद्र प्रताप सिंह के लिए क्रॉस वोटिंग की और उनकी जीत का रास्ता आसान हो गया। साकेंद्र प्रताप सिंह को तीन और वोट गठबंधन के प्रत्याशी के पाले के मिलने की उम्मीद थी पर वे नहीं मिल पाए। पंजाब से लौटे गठबंधन प्रत्याशी के एक सदस्य को पहले ही भाजपा नेताओं ने अपने पाले में कर लिया था। संवाद
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