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Bijnor News: वन विभाग ने जिले में तलाशे 1407 वेटलैंड

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बिजनौर में बैराज पर गंगा किनारे बैठे प्रवाक्षी पक्षी। संवाद
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रजनीश त्यागी
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बिजनौर। अभी तक वेटलैंड के नाम पर आप गंगा बैराज पर हैदरपुर, अफजलगढ़ क्षेत्र में हरेवली और पीलीडैम को ही जानते होंगे। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह चौंकाने वाले हैं। जिले में दस या बीस नहीं, बल्कि 1407 वेटलैंड मौजूद हैं, जिन्हें वन विभाग ने चिह्नित किया है। इनमें से बड़े वेटलैंड को चिह्नित कर उनके संरक्षण का काम भी शीघ्र शुरू किया जाएगा।
मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा जिलों से होकर गुजरने वाली हस्तिनापुर सेंक्चुअरि प्रवासी पक्षियों के लिए बेहतरीन ठिकाना है। यहां पर 16 वेटलैंड मौजूद हैं। इसके अलावा बिजनौर जिले की बात करें तो यहां पर वेटलैंड की संख्या 1407 तक है। इनमें से कई ऐसे हैं, जहां सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का बसेरा भी रहता है।
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क्योंकि यहां पर पक्षियों के लिए दलदल, कम गहरा पानी, घास के मैदान, रुकने को पर्याप्त जगह और उनके लिए हर तरह का भोजन यहां उपलब्ध है। वन विभाग ने वेटलैंड की पूरी सूची तैयार कर ली है और अब इनमें से ऐसे वेटलैंड चिह्नित किए जाएंगे, जहां पर प्रवासी पक्षी आते हैं। प्रशासन के साथ मिलकर जहां अतिक्रमण हटवाया जाएगा।
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n ये होते हैं वेटलैंड वेटलैंड, जिसे आद्रभूमि भी कहा जाता है, यहां झील, दलदल, रुका हुआ पानी, जहां मछलियों से लेकर छोटे-छोटे जलीय जीव, घास के छोटे या बडे़ मैदान आदि चीजें होती हैं। हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में 16 वेटलैंड हैं, वहीं बिजनौर में हरेवली पर काफी बड़ा वेटलैंड है। इन क्षेत्रों में दिसंबर से मार्च माह के बीच कॉमन क्रेन, ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क, लिटिल ग्रेब, ग्रेट कॉर्मोरेंट, बुली नेक्ड स्टॉर्क, एशियन ओपन बिल स्टॉक, ग्रे लैग गूज, बार हेडेड गूज, सफेद इबीस, नॉर्दन पिनटेल, कॉमन पोचार्ड, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, सारस क्रेन, कॉमन कूट, लाल सुर्खाब आसानी से देखे जा सकते हैं। (संवाद)
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