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Bijnor News: बिजनौर - भारत सरकार से जैव विविधता पार्क को मिली मंजूरी

Fri, 18 Aug 2023 10:58 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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- विदुरकुटी में गंगा की दो धाराओं के बीच बनेगा जैव विविधता पार्क
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- 40 हेक्टेयर जमीन में बनना है पार्क, 6.28 करोड़ रुपये आएगी लागत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सबकुछ ठीक रहा और समय से काम पूरा हुआ तो अगले साल तक विदुरकुटी ऐतिहासिक, पौराणिक और प्राकृतिक रूप से जिले का सबसे खूबसूरत पर्यटक स्थल बन जाएगी। महात्मा विदुर के मंदिर के पास से होकर जहां गंगा की धारा बहेगी, वहीं जैव विविधता पार्क लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेगा। 40 हेक्टेयर जमीन में बनने वाले जैव विविधता पार्क को भारत सरकार की मंजूरी मिल गई है। इस पर डीएम उमेश मिश्रा ने वन अधिकारियों के साथ शुक्रवार शाम बैठक कर कार्य योजना पर चर्चा की।
बिजनौर में विदुरकुटी जल्द ही पर्यटन के नक्शे पर नए आयाम हासिल करेगी। जहां एक ओर विदुरकुटी के पास गंगा की धारा लाने का प्रयास हो रहा है, वहीं अब जैव विविधता पार्क बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारत सरकार से 40 हेक्टेयर भूमि में 6.28 करोड़ की लागत से बनने वाले जैव विविधता पार्क को मंजूरी मिल गई। शुक्रवार की शाम डीएम उमेश मिश्रा और डीएफओ अरुण सिंह, एसडीओ ज्ञान सिंह के साथ बैठक की। इसमें इसकी कार्ययोजना पर चर्चा की। साथ ही इसी के साथ गंगा की धारा लाने के लिए बनने वाली कैनाल पर भी चर्चा हुई।
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तैयारी हो रह है कि जैव विविधता पार्क के साथ-साथ कैनाल का निर्माण भी कराया जाए। यह पार्क कैनाल बनने के बाद गंगा की दो धाराओं के बीच में बनेगा, जिसमें पुल के माध्यम से लोग पहुंचकर घूम पाएंगे। डीएम ने बताया कि वन अफसरों, सिंचाई विभाग के अफसरों के साथ जैव विविधता पार्क और कैनाल पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। जैव विविधता पार्क को भारत सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। अब कैनाल के लिए भी शासन स्तर पर वार्ता की जा रही है।
जैव विविधता पार्क में बनेंगी यह वाटिकाएं
पार्क में नक्षत्र वाटिका, पंचवटी वाटिका खास होगी। इनमें ग्रह नक्षत्रों के अनुसार पौधे लगाए जाएंगे। ये पौधे जनपद में मुश्किल से ही दिखाई देते हैं। इसके अलावा फलदार और छायादार पौधे भी लगेंगे। रुद्र वन भी बनेगा, जिसमें भगवान शिव से संबंधित पौधे लगेंगे। कल्पतरु वन भी बनेगा। जलीय परितंत्र भी विकसित किया जाएगा, जिसमें कमल, मछली और कछुआ आदि रहेंगे। खुशबू देने वाले पौधे भी रोपे जाएंगे।



ऐतिहासिक महत्व है विदुर कुटी का

विदुर कुटी का ऐतिहासिक महत्व है। महाभारत का युद्ध शुरू होने से पहले महात्मा विदुर ने संन्यास लेकर गंगा किनारे अपना आश्रम बना लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के 56 भोग त्यागकर महात्मा विदुर की कुटिया में जाकर बथुए का साग खाया था। यहां पर बथुआ आज भी 12 महीने मिलता है। साथ ही श्रीकृष्ण की चरण पादुकाएं आज भी रखी हैं।
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औषधीय, फलदार, छायादार पौधे लगेंगे
बायोडायवर्सिटी पार्क में औषधीय गुण वाले पौधे, फलदार, छायादार पौधे आदि लगाए जाएंगे। पौधों के आगे बोर्ड पर उनकी विशेषताएं भी लिखी होंगी। पार्क में जगह-जगह पर सेल्फी प्वाइंट भी बनाए जाएंगे। पार्क को इस तरह से विकसित किया जाएगा कि शहरवासी यहां पर परिवार के साथ पिकनिक मनाने आएं।
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