इस केस के विवेचक झालू चौकी इंचार्ज पर गंभीर आरोप लगाए। आरोप लगाया कि चौकी प्रभारी इसी केस की विवेचना को लेकर मसूरी के एक होटल में पहुंचे और उसे भी बुलाया। होटल के कमरे में ठहरने का रिकॉर्ड लेने के बाद देहरादून आ गए।
आरोप है कि चौकी प्रभारी ने साथ में रात गुजारने की बात कही। ऐसा नहीं करने पर केस में गंभीर धाराओं को हटाने की बात कही। महिला ने दरोगा पर उसके कंधे पर हाथ रखने का भी आरोप लगाया है। आरोप है कि रात में फिर से विवेचक ने उसे फोन किया और अपनी मित्र को लेकर आने के लिए दबाव बनाया।
मामले में एसपी ने जांच बैठा दी। आरोप साबित होने पर एसपी के आदेश पर चौकी प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
वहीं चौकी प्रभारी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि महिला ने अपने पति और ससुरालियों पर केस दर्ज कराया था, जिसकी विवेचना के क्रम में गर्भपात का सबूत मांगा गया। दुष्कर्म की धारा के संबंध में होटल पहुंचकर जांच की गई। वह अकेले नहीं बल्कि महिला आरक्षी को लेकर जांच के लिए गए थे। धाराएं हटने की आशंका के बीच चिढ़कर और दबाव बनाने के लिए ऐसे गलत आरोप लगाए गए हैं।