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गन्ना उत्पादन में मंडल में बिजनौर अव्वल

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गन्ना उत्पादन में मंडल में बिजनौर अव्वल
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बिजनौर। गन्ना उत्पादन में जिला बिजनौर अपने मंडल में सिरमौर बन गया है। प्रति हेक्टेयर जमीन से गन्ने की औसत पैदावार 864.92 क्विंटल निकली है। जबकि पूरे सूबे की औसत पैदावार 811 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यानि किसानों ने हर बीघा जमीन से करीब 23 हजार रुपये का गन्ना बेचा है। मंडल के बाकी जिले बिजनौर से काफी पीछे हैं। सूबे में जिले का गन्ना पैदावार में छठा नंबर है।
जूून में गन्ना पेराई पूरी हो गई थी। गन्ना पेराई के बाद प्रदेश भर की मिलों में पेेराई और रकबे के आधार पर गन्ना पैदावार का औसत निकाला जाता है। इसी के आधार पर देखा जाता है कि किसानों ने कितना गन्ना खेतों से निकाला है और उनकी आमदनी कितनी बढ़ी है। हाल ही में संपन्न हुए पेराई सत्र में जिले के किसानों ने प्रति बीघा जमीन से करीब 69 क्विंटल गन्ना निकाला है। मुरादाबाद मंडल में गन्ने की सबसे ज्यादा पैदावार बिजनौर में ही हुई है। हालांकि मुजफ्फरनगर, शामली आदि जिले गन्ना उत्पादन में बिजनौर से कहीं आगे हैं। लेकिन एक समय ऐसा था जब बिजनौर व इन जिलों में गन्ने के औसत उत्पादन डेढ़ गुना से ज्यादा का फर्क होता था। अब जिले में भी पिछले कुछ सालों में गन्ने का औसत उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। गन्ने से किसान बंपर कमाई कर रहे हैं। इसी वजह से किसान लगातार गन्ने का रकबा बढ़ा रहे हैं। इस साल तो किसानों ने गन्ने के रकबे में रिकॉर्ड साढ़े 11 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। वजह यह है कि गन्ने से ज्यादा पक्की फसल कोई नहीं है। इसके न्यूनतम मूल्य पर बिकने और भुगतान मिलने की गारंटी होती है।
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जिला गन्ना उत्पादन
शामली 990.64
मुजफ्फरनगर 907.64
मेरठ 910.04
बुलंदशहर 876.72
लखीमपुर खीरी 868.48
बिजनौर 864.92
अमरोहा 823.36
मुरादाबाद 773.12
संभल 793.80
रामपुर 803.20
नोट : आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं। उत्पादन क्विंटल प्रति हेक्टेयर में हैं।
पिछले साल से ज्यादा कमाई
पिछले साल जिले में गन्ने की औसत पैदावार 859 विंटल प्रति बीघा थी। यानि पिछले साल के मुकाबले किसानों ने इस साल प्रति बीघा जमीन में दो हजार रुपये का गन्ना ज्यादा निकाला है। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह का कहना है कि जिले में औसत पैदावार बढ़ी है। किसान अगेती प्रजाति बोकर व खेत में मेहनत करके अच्छी कमाई कर रही हैं। किसान फसल चक्र अपनाते हुए खेती करें। फसल चक्र अपनाने से ही जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहती है।
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