सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंची। बच्चों को किसी तरह बस से बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल बच्चों में भव्या (4), अराधना (10), इशिका (8), आरजू, जीवांशु, उबैर (10), आयुषी पुत्री मुनेश पाल, अर्बपाल और परी आदि शामिल हैं।
हादसे के बाद सहमे बच्चे।
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गनीमत यह रही कि जिस 11 हजार वोल्ट की लाइन से बस टकराई, उसमें उस वक्त करंट नहीं था। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। पुलिस ने जेसीबी मशीन की मदद से बस को सीधा कराया और थाने में खड़ा करा दिया। लोगों ने बताया कि बस 32 बच्चों को लाने ले जाने के लिए अधिकृत है। लेकिन इसमें 60 से अधिक बच्चे बैठे हुए थे।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल की बसें जर्जर स्थिति में हैं। बच्चों को क्षमता से अधिक भरा जा रहा है। चालक भी प्रशिक्षित नहीं होते। मैनेजमेंट से शिकायत करने पर सुनवाई नहीं होती। संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी भी मौन हैं। बच्चों ने बताया कि हादसे के वक्त बस की रफ्तार काफी तेज थी ।
बताते चलें कि 13 दिसंबर 2024 को भी इसी स्कूल की बस पलट गई थी। लेकिन उस हादसे से भी स्कूल प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।
सीओ अफजलगढ़ राजेश सोलंकी ने बताया कि बस में 25 से अधिक बच्चे सवार थे। जांच में सामने आया है कि बस की फिटनेस पांच साल पहले समाप्त हो चुकी है। हादसे में घायलों को धामपुर और अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। स्कूल संचालक और बस चालक अरविंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।