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बिजनौर : उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी ने जेल में खाया जहर, अधिकारियों में मचा हड़कंप

Wed, 17 Mar 2021 07:35 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर

सार

  • डिप्टी जेलर पर बंदी राइटर से चाय मे जहर दिलाने का लगाया आरोप
  • अधिकारी बोले, कैदी ने दबाव बनाने को जहर खाने का किया नाटक  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिला कारागार में महिला व बेटे की हत्या में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी ने जहर खा लिया। घटना से जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। कैदी को जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया। कैदी ने डिप्टी जेलर अमरजीत सिंह पर उत्पीड़न व मारपीट करने के साथ अपने बंदी राइटर से चाय में जहर दिलाने का आरोप लगाया है। जेल के अधिकारी इसे कैदी के दबाव बनाने का नाटक बता रहे हैं।

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नगीना के मोहल्ला निवासी डाॅ. विवेक गुप्ता ने वर्ष 2011 में अपने साथी के साथ मिलकर लूट के इरादे से घर में घुसकर दोस्त की पत्नी व उसके बेटे की हत्या कर दी थी। 2013 में विवेक गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा हुई। तब से बिजनौर जेल में वह सजा काट रहा हैं। दो साल से जेल प्रशासन ने  विवेक गुप्ता को बंदी मरीजों की देखभाल के लिए जेल के अस्पताल में लगा रखा था।

दो माह पहले गतिविधियां संदिग्ध मिलने के कारण उसे वहां से हटा कर जेल की बैरक नंबर तीन-ए में भेज दिया। जेल के अधिकारियों के मुताबिक जेल के अस्पताल में फिर से वापस आने के लिए वह अधिकारियों पर दबाव बना रहा था। मंगलवार को दिन में उसने जेल की बैरक में जहर खा लिया। इसका पता चलते ही उसे तुुरंत जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया। वहां कैदी की हालत में सुधार हैं।

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कैदी विवेक गुप्ता के मुताबिक डिप्टी जेलर अमरजीत सिंह चाहते थे कि जेल के अस्पताल में आने वाले प्रभावशाली लोगों से वह धन की उगाही करके उन्हें दे। ऐसा नहीं करने पर डिप्टी जेलर उसके साथ मारपीट करने के साथ उत्पीड़न कराते थे। दो माह पहले इसी वजह से उन्हें अस्पताल हटा दिया। मंगवार को दिन में करीब पौने बारह बजे डिप्टी जेलर का बंदी राइटर शीशपाल ने चाय में जहर मिलाकर उन्हें दे दिया। हालत बिगड़ने पर चाय में जहर देने का पता चला। 

दबाव बनाने को किया जहर खाने का नाटक : जेलर 
जेलर शैलेद्र प्रताप सिंह के मुताबिक कैदी विवेक गुप्ता ने जेल अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए जहर खाने का नाटक किया है। जेल के अस्पताल से कैदी की गतिविधियां संदिग्ध मिलने पर हटा दिया था। कैदी फिर से अस्पताल का कामकाज देखने के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रहा था। कैदी जो आरोप लगा रहा है, वह गलत हैं। कैदी चिकित्सक पेशे से जुड़ा है। उसने क्या खाया, ये उसे ही मालूम है। 

खतरे से बाहर है बंदी : चिकित्सक
इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकित चौधरी ने बताया कि फिलहाल मरीज की हालत खतरे से बाहर है। उसे पुलिस सुरक्षा में चिकित्सकों की देखरेख में जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। मरीज ने किस प्रकार के जहरीले पदार्थ खाया है, अभी इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
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